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बाबुल का घर भले ही छूटे, नहीं छूटेगी लाडलियों की पढ़ाई

हिसार :बाबुल को लाडली बेटियां बेटों से भी प्यारी होती हैं। लाडली बेटियां शादी से पहले अपने तो शादी के बाद पति के परिवार का ख्याल रखते हुए जिम्मेदारी का निर्वहन करती हैं। मगर इस दौर के बीच बहुत सी लाडलियों की पढ़ाई अधर में रहने से सपने भी पीछे छूट जाते हैं। लेकिन अब शिक्षा विभाग प्रयास करेगा कि बाबुल का घर भले ही छूट जाए, लेकिन बेटियों की पढ़ाई नहीं छूटनी चाहिए। शिक्षा विभाग ने ट्रांजिशन नाम की स्कीम तैयार की है जिसमें 26 लाख रुपये का बजट खर्च कर बेटियों पर सर्वे और अभिभावकों की काउंसलिंग कर ये जाना जाएगा कि आखिर, बेटियों की पढ़ाई कैसे जारी रखी जा सके। सर्वे में जुटाई गई जानकारी के आधार पर आगे की योजना बनाई जाएगी। शिक्षा विभाग के सामने आया कि ग्यारहवीं कक्षा में जाने तक ही बेटियों की संख्या कम हो जाती है। अभिभावकों की इच्छा न होने, बचपन में शादी करने और गावों में सीनियर सेकेंडरी स्कूल न होने के कारण बेटियां आगे नहीं पढ़ पाती हैं। तो ऐसे में कितनी ऐसी बेटियां है जिनकी पढ़ाई छूटी और कितनी ऐसी हैं जो पढ़ना चाहती हैं, उन पर फोकस किया जाएगा।

यूडिलाइज फार्म बताएगा कितनी बेटियों ने छोड़ी पढ़ाई

इस योजना में शिक्षा विभाग ने एक फार्म तैयार किया है, जिसे यूडिलाइज फार्म कहते हैं। विभाग की ओर से ये फार्म हर ब्लॉक के सरकारी स्कूल के प्राचार्या को दिए जा चुके हैं, जोकि पांचवीं से छठी, आठवीं से नौंवी और दसवीं से ग्यारहवीं कक्षा में दाखिला लेने वाली बेटियों की संख्या को फार्म में भरा जाएगा, जिसके बाद पिछली क्लास के रजिस्टर से इस फार्म में अंकित संख्या का मिलान किया जाएगा। जिससे यह पता लग जाएगा कि पिछले साल पांचवीं, आठवीं और दसवीं कक्षा में कितनी बेटियां शिक्षा ग्रहण कर रही थी, जबकि अगली कक्षा में कितनी बेटियों ने दाखिला लिया है।

अभिभावकों की काउंस¨लग, बेटियों को मिलेगा उपहार

विभाग की ओर बेटियों के अभिभावकों की काउंस¨लग भी की जाएगी। तो बेटियों को प्रोत्साहन स्वरूप उन्हें सेनेटरी, डिक्शनरी या फिर पाठ्यक्रम से संबंधित खास उपहार दिया जाएगा। ताकि अभिभावकों को महसूस हो, कि उनकी बेटी खास है। इसके लिए अतिरिक्त उपायुक्त एएस मान, जिला परियोजना अधिकारी राजकुमार नरवाल और जिला प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर देवेंद्र विभाग की ओर से अभिभावकों से रूबरू होंगे। इस दौरान अभिभावकों से उनकी समस्या, शिकायत और उनकी मानसिकता को परखा जाएगा।

इस तरह किया जाएगा सर्वे, ये होगा फायदा

काउंसलिंग में जाना जाएगा कि वाकई अभिभावक परेशानी के कारण बेटियों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं या फिर अकारण ही अभिभावकों समस्या को अधिक महत्व देकर बेटियों को शिक्षा से दूर कर रहे हैं। उसके बाद उनको टिप्स भी दिए जाएंगे। पढ़ाई छोड़ने से संबंधित डेटा एडीसी के माध्यम से सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि गांवों में स्कूल बनाने से लेकर नई योजनाओं को शुरू किया जा सके।

वर्जन

बेटियों को पढ़ाना बेहद आवश्यक है, बेटियां पिछड़े नहीं इसके लिए ये प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसमें कई चरण होंगे, प्राप्त जानकारी के आधार पर आगे की योजना बनाई जाएगी। रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा।