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निजी अस्पतालों की हड़ताल-मरीज बेहाल, सरकारी पर रहा दबाव

क्लीनिकलएस्टेब्लिशमेंटएक्ट के विरोध में शुक्रवार को सभी प्राइवेट डॉक्टरों ने हड़ताल कर रोष जताया। पूरा दिन प्राइवेट अस्पतालों अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ताले लटके रहे और मरीजों को इलाज करवाने के लिए भटकना पड़ा। प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों में देखने को मिला, सिविल अस्पताल में गुरुवार की अपेक्षा शुक्रवार को ओपीडी में 276 मरीज ज्यादा पहुंचे। इमरजेंसी में भी आम दिनों की अपेक्षा भीड़ ज्यादा रही। 

गांव कठवाड़ की युवती भोजन में जहरीला पदार्थ खाने के चलते उसकी तबीयत बिगड़ी तो परिजन प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन वहां डॉक्टर ही नहीं मिले। आनन-फानन में परिजनों ने युवती को सिविल अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा। हड़ताल में आयुष डेंटल क्लीनिक संचालक भी शामिल हुए। 

जिले में 87 ऐसे अस्पताल हैं जहां एमबीबीएस डॉक्टर कार्यरत हैं। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू होने से ये सभी अस्पताल प्रभावित होंगे। आईएमए के अनुसार नए एक्ट में ऐसे नियम बनाए गए हैं कि छोटे शहरों के अस्पतालों के लिए उन्हें पूरा करना संभव ही नहीं। ऐसे में सिर्फ कॉर्पोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचेगा। 

प्रधान के नेतृत्व में डीसी के माध्यम से सीएम को सौंपा ज्ञापन 

क्लीनिकएस्टेब्लिशमेंट एक्ट का विरोध कर रहे डॉक्टर आईएमए प्रधान डॉ. विजय कुमार के नेतृत्व में पिहोवा चौक पर एकत्रित हुए। यहां नए एक्ट के खिलाफ लिखे नारों की तख्तियां लेकर रोष जताया। डॉ. विजय कुमार ने कहा कि दमनकारी क्लीनिक एस्टेब्लिशमेंट एक्ट डॉक्टर जनविरोधी है। इस एक्ट के लागू होने सेे कॉर्पोरेट अस्पतालों को ही फायदा होगा। 

बुजुर्ग को था सीने में दर्द नहीं मिला इलाज तो सरकारी में गए 

मॉडलटाउन निवासी गौरव ने बताया कि उसके 68 वर्षीय पिता कर्मचंद को दोपहर 11 बजे सीने में तेज दर्द हुआ। वे अपनी कार में पिता को सिग्नस अस्पताल लेकर गए तो हड़ताल के कारण उन्हें दाखिल नहीं किया। तुरंत सिविल अस्पताल लेकर गए तो पता चला कि हार्ट अटैक का झटका था। रोष जताना सभी का हक है लेकिन इमरजेंसी सेवाएं जारी रखनी चाहिए। 

बंद मिला अस्पताल 

गांवकैलरम के राममेहर ने बताया कि उसके 14 महीने के बेटे को तीन दिन से बुखार है। गांव में डॉक्टर की दवाई से आराम नहीं हुआ तो करनाल रोड पर प्राईवेट अस्पताल में बच्चे को लेकर आया। यहां के स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। सरकारी अस्पताल में इतनी भीड़ होती है कि वहां स्वास्थ्य व्यक्ति भी बीमार हो जाए। इसलिए केमिस्ट से बुखार की दवाई लेकर जा रहा है, शनिवार को दोबारा आना होगा। 

^हर गरीब लाचार व्यक्ति को सस्ता सुलभ उपचार उपलब्ध करवाना सरकार की नैतिक जिम्मेवारी है, लेकिन इस एक्ट के मौजूदा प्रारूप से यह संभव नहीं है। इसलिए एक्ट में संशोधन करने की आवश्यकता है। डॉ.जितेंद्र गिल, सदस्य भारतीय चिकित्सा परिषद 

^प्राईवेटडॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही अपनी तैयारियां पूरी कर ली थी। शुक्रवार को विभाग के सभी कर्मचारी ड्यूटी पर रहे और मरीजों को परेशानी नहीं आने दी। सरकारी अस्पतालाें में शाम तक डाॅक्टराें की ड्यूटी थी। डॉ.अशोक चौधरी सिविल सर्जन कैथल 

एक्ट में ये किए जा रहे प्रावधान 

nपंजीकृतअस्पताल को मरीज से वसूला जाने वाला परामर्श शुल्क, ऑपरेशन जांच शुल्क के साथ अन्य शुल्क सार्वजनिक करने होंगे। पंजीकृत अस्पतालों में आपातकालीन मरीजों के इलाज से इनकार नहीं कर सकेंगे। 

nधारा-10के तहत जिला पंजीकरण प्राधिकरण बनेगा। इसका मुखिया संबंधित जिले का उपायुक्त होगा। जिला स्वास्थ्य अधिकारी संयोजक होगा। तीन अन्य सदस्य नामित होंगे। 

nधारा-12के तहत पंजीकरण के लिए शर्तें पूरी करनी होंगी। इसमें कर्मचारियों की सं या, रिकॉर्ड का रख-रखाव, हवादार खुला भवन, पेशेवर योग्यता पूरी करना अनिवार्य होगा।