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31 दिसंबर तक होगे फसलों का बीमा : डीसी

कैथल : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना रबी 2017-18 को हरियाणा सरकार द्वारा गेहूं, जौ, सरसों व चना फसलों के लिए प्रति एकड़ प्रीमियम राशि एवं बीमित राशि निर्धारित की गई है। इन चारों फसलों के लिए 31 दिसंबर 2017 तक बीमा करवाया जा सकता है। योजना के अंतर्गत बीमित ईकाई ग्राम पंचायत को माना गया है, जबकि स्थानीय तीन प्राकृतिक आपदाओं जलभराव, ओलावृष्टि एवं भू-स्खलन की स्थिति में खेत स्तर पर नुकसान का आंकलन किया जाएगा। जिला में आइसीआइसीआइ लोंबार्ड के प्रतिनिधि आशीष कुमार से फसल बीमा के लिए संपर्क किया जा सकता है।

डीसी सुनीता वर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना रबी 2017-18 के लिए चार फसलों गेहूं, सरसों, जौ और चना को बीमित किया गया है। फसली ऋण लेने वाले किसानों के लिए यह योजना अनिवार्य है, जबकि गैर फसली ऋण किसान हेतू यह योजना वैकल्पिक है। गैर फसली ऋण किसान इच्छा अनुसार संबंधित बैंक या कॉमन सर्विस सेंटर से अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार गेहूं की फसल का प्रति एकड़ प्रीमियम 368 रुपये तथा प्रति एकड़ बीमित राशि 24 हजार 484 है। इसी प्रकार जौ की फसल का प्रति एकड़ प्रीमियम 204 रुपये तथा प्रति एकड़ बीमित राशि 13 हजार 557 रुपये है। सरसों फसल का प्रति एकड़ प्रीमियम 219 रुपये तथा प्रति एकड़ बीमित राशि 14 हजार 569 रुपये निर्धारित की गई है। चना फसल का प्रति एकड़ प्रीमियम 158 रुपए तथा प्रति एकड़ बीमित राशि 10 हजार 522 रुपये है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत ग्राम पंचायत को बीमित यूनिट माना गया है। स्थानीय आपदा जैसे भू-स्खलन, जल भराव व ओला वृष्टि की स्थिति में किसान को 48 घंटे के अंदर इसकी सूचना कृषि उपनिदेशक कार्यालय में देनी होगी। किसान द्वारा इन तीनों आपदाओं की सूचना देने के बाद 12 दिनों के अंदर-अंदर कृषि विभाग नुकसान की निरीक्षण रिपोर्ट किसान की उपस्थिति में तैयार करेगा। इन तीनों आपदाओं की स्थिति में नुकसान का आंकलन खेत स्तर पर किया जाएगा।

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कम पैदावार पर मिलेगा मुआवजा

डीसी ने बताया कि इसके अलावा किसी भी कारणवश यदि किसी गांव विशेष की पहले से निर्धारित औसत पैदावार की अपेक्षा फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर औसत पैदावार कम रह जाती है तो उस गांव के सभी बीमित किसानों को औसत पैदावार में आई कमी के अनुसार मुआवजा मिलेगा। फसल में कीड़े व बीमारी लगने की स्थिति में भी यदि औसत पैदावार पहले से निर्धारित औसत पैदावार से कम रह जाती है तो इस स्थिति में भी ग्राम स्तर पर ही मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन बीमारी व कीड़े से प्रभावित फसल का खेत स्तर पर निरीक्षण व मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है।