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दूर होगी पैरा खिलाड़ियों की परेशानी, पहली बार देश में होगा क्लासीफिकेशन कोर्स

फरीदाबाद.अपनी कैटेगरी को लेकर पैरा खिलाड़ियों की परेशानी अब जल्द दूर हो जाएगी। उन्हें किसी भी चैंपियनशिप से पहले जानकारी मिल जाएगी कि वह किस कैटेगरी में खेलेंगे। इससे वह बेहतर तैयारी कर सकेंगे। पहली बार साई और पैरालंपिक कमेटी आॅफ इंडिया मिलकर देश में क्लासीफिकेशन ट्रेनिंग आयोजित कर रहे हैं। इस ट्रेनिंग में देश के चुनिंदा 55 डाॅक्टर शामिल होंगे। जबकि ट्रेनिंग देने के लिए अलग-अलग देशों के पांच क्लासीफायर भारत आएंगे। यह ट्रेनिंग कैंप गुजरात के गांधीनगर में 17 से 19 दिसंबर तक होगा। पीसीआई (पैरालिंपिक कमेटी आफ इंडिया) के अनुसार इस ट्रेनिंग कैंप के बाद चैंपियनशिप से पहले ही खिलाड़ियों की कैटेगरी तय हो जाएगी। पैरा खिलाड़ियाें की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता है। जैसे अगर किसी खिलाड़ी का हाथ नहीं होता तो उसे अलग वर्ग में रखा जाता है। 
वहीं जिन खिलाड़ियों का हाथ आधा कटा होता है उन्हें अलग कैटेगरी में डाला जाता है। इसी तरह शरीर के दूसरे अंगों के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी तय की जाती है। इसको क्लासीफिकेशन कहा जाता है। इसलिए एक इवेंट को अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से कराया जाता है।

अभी तक विदेशों में होती थी कैटेगरी तय
पैरालिंपिक कमेटी आॅफ इंडिया के अनुसार अभी तक इंटरनेशनल स्तर पर खेलने वाले पैरा खिलाड़ियों की कैटेगरी चैंपियनशिप से तुरंत पहले तय होती है। चैंपियनशिप के दौरान ही खिलाड़ियों को उनकी कैटेगरी बताई जाती है। क्लासीफिकेशन तय करने के लिए अलग से ट्रेनर मौजूद होते हैं। इन ट्रेनर को सरकार प्रत्येक खिलाड़ी के हिसाब से 20 से 25 हजार रुपए का भुगतान भी करती है। वहीं देश में होने वाली नेशनल प्रतियोगिताओं के लिए दौरान खिलाड़ियों की कैटेगरी तय करने के लिए बाहर से क्लासीफायर आमंत्रित किए जाते हैं।

ट्रेनिंग कैंप में 55 डाॅक्टर लेंगे भाग 
पीसीआई के अनुसार गुजरात के गांधी नगर में होने वाले इस कैंप में देश के 55 डाक्टर भाग लेंगे। ये सभी आफिसर पीसीआई और साई की ओर से चयनित किए गए हैं। वहीं इन्हें ट्रेनिंग देने के लिए न्यूजीलैंड से रायलेन इसाबेल, यूएसए से जेरी क्लेटोन, रिचर्ड रोबोट,अल्जीरिया से मोहम्मद खिलाद्दी, ट्यूनीशिया से हालिम जेबाली भारत आएंगे।

^भारत में पहली बार क्लासीफिकेशन के लिए ट्रेनिंग कोर्स हो रहा है। इसमें देश के 55 डाॅक्टर शामिल होंगे। यह कैंप पैरा खिलाड़ियों के लिए काफी मददगार साबित होगा, क्योंकि खिलाड़ियों को कैंप के दौरान ही अपनी कैटेगरी का पता लग जाएगा। 
-शाहरुख शमशाद, सीईओ, पैरालिंपिक कमेटी आॅफ इंडिया।

^कैटेगरी तय न होने से खिलाड़ियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं किसी भी खिलाड़ी का क्लासीफिकेशन कराने के लिए विदेशी ट्रेनर को भारी भुगतान करना पड़ता है। उम्मीद है इस कैंप के बाद भारत में ही खिलाड़ी का क्लासीफिकेशन हो सकेगा। 
-गिर्राज सिंह, सदस्य, पैरालिंपिक कमेटी आॅफ इंडिया।