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अरावली का दायरा सीमित करने से कालोनाइजर होंगे खुश

अरावली पहाड़ी क्षेत्र का दायरा सीमित करने पर सबसे अधिक खुशी कालोनाइजरों को होगी। इनके अलावा भी जिन लोगों ने गैर-वानिकी कार्य कर रखे हैं, वे भी खुश होंगे। दायरा सीमित करने से सभी निर्माण अवैध से वैध हो जाएंगे। दबी जुबान से वन विभाग के वर्तमान अधिकारी से लेकर पूर्व अधिकारी तक कह रहे हैं कि वो नहीं चाहते कि अरावली का दायरा सीमित हो। अरावली आंदोलन के सूत्रधार पूर्व वन संरक्षक डॉ. आरपी बालवान कहते हैं कि यदि अरावली का दायरा सीमित किया गया फिर गुरुग्राम एवं फरीदाबाद के लोगों को सांस लेने के लिए आक्सीजन का सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा

जानकारी के मुताबिक अरावली पहाड़ी क्षेत्र की लगभग एक लाख भूमि पर वन विभाग ने अरावली प्रोजेक्ट के तहत पौधरोपण किया था। इसके अलावा लगभग 40 हजार एकड़ भूमि सेक्टर चार-पांच के दायरे में यानी प्रतिबंधित वन क्षेत्र है। अरावली प्रोजेक्ट के तहत जितनी भूमि पर पौधरोपण किया गया उसे भी वन क्षेत्र घोषित किया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में इसके संरक्षण की बात कही है। वन क्षेत्र घोषित होने के बाद भी अनुमान के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों के दौरान गुरुग्राम एवं फरीदाबाद इलाके में लगभग 15 हजार एकड़ भूमि पर गैर-वानिकी कार्य कर दिए गए। काफी संख्या में ऊंची-ऊंची इमारतें बना दी गईं। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, गौशाला, मंदिर से लेकर कई प्रकार के निर्माण कार्य कर दिए गए।

यह कार्य लगातार जारी है। किस प्रकार से गैर-वानिकी कार्य किए गए या किए जा रहे हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि लगभग 9 साल पहले तत्कालीन वन संरक्षक डॉ. आरपी बालवान ने केवल फरीदाबाद के बारे में ही चार हजार एकड़ भूमि पर गैर-वानिकी कार्य किए जाने की रिपोर्ट तैयार की थी। उस दौरान कहा गया था बड़खल लेक के दोनों तरफ काफी दूर तक नहीं बल्कि आसपास के इलाकों में सभी निर्माण अवैध हैं। उन निर्माणों के बदले हुडा द्वारा मुआवजा देने की बात भी सामने आई थी लेकिन ध्यान नहीं दिए जाने की वजह से गैर वानिकी कार्य का दायरा बढ़ता चला गया।

दायरा सीमित करने से अशांत हो जाएंगे वन्य जीव: अरावली का दायरा सीमित करने पर इलाके के वन्य जीव अशांत हो जाएंगे। अशांत होने पर धीरे-धीरे संख्या कम हो जाएगी। मुश्किल से पिछले कुछ वर्षों के दौरान वन्य जीवों की संख्या बढ़ी है। खनन के साथ ही अवैध खनन के ऊपर काफी हद तक रोक लगने से संख्या बढ़ी है। तेंदुआ, लकड़बग्गा, हिरण, खरगोश, गीदड़ सहित कई प्रकार के वन्य जीव इलाके में हैं। दबी जुबान से वन अधिकारी कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान 10 से अधिक तेंदुए मौत के शिकार हो चुके हैं। इसके पीछे मुख्य वजह ही अरावली क्षेत्र में गैर वानिकी कार्य हैं। आबादी के नजदीक वन्य जीव आ जाते हैं। कभी लोगों के शिकार तो कभी सड़क दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर किस कदर बढ़ता जा रहा है, इससे सभी वाकिफ हैं। पूरी दुनिया में देश की बदनामी हो रही है। अरावली पहाड़ी क्षेत्र की वजह से गुरुग्राम एवं फरीदाबाद के लोग सांस ले रहे हैं। खासकर साइबर सिटी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर गुरुग्राम में अरावली को हटा दें तो हरियाली के नाम पर क्या बचता है। यदि अरावली बर्बाद हुई फिर सभी को सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा। किसी भी कीमत पर अरावली का दायरा एक इंच भी कम नहीं होना चाहिए। यहां तक कि जिन लोगों ने गैर वानिकी कार्य कर रखे हैं, उन्हें मुआवजा देकर निर्माण हटाया जाए।