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२०१९ के चुनाव से पूर्व ही हरियाणा के कांग्रेसी नेताओं में छिड़ी चौधर की जंग

२०१९ के चुनाव से पूर्व ही हरियाणा के कांग्रेसी नेताओं में छिड़ी चौधर की जंग
 हरियाणा के पड़ोसी राज्य पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह ने सत्तारूढ़ शिरोमणि अकालीदल और भाजपा को करारी शिकस्त देकर जब से यह सिद्ध किया है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भी कांग्रेस राज्यों मंे सत्ता हासिल कर सकती है तब से ही हरियाणा के कांग्रेसी नेताओं ने यहां भी २०१९ के चुनावके लिए दिनों की गिनती शुरू कर दी है। आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व हरियाणा कांग्रेस की कमान सम्भालने के लिए यहां के अनेक दिग्गज कांग्रेसी नेताओं में चौधर की जंग छिड़ी हुई है।
हरियाणा की विधान सभा मंे वर्तमान में भाजपा के ४७, इनेलो के १९, शिरोमणि अकालीदल का १, जनहित कांग्रेस के २ विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के १७, बीएसपी का १ तथा निर्दलीय ५ विधायक हैं। हरियाणा में चौधर की जंग के लिए अब पूरी तरह सक्रिय हो चुके कांग्रेसी नेताओं मंे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री चौधरी बंसीलाल के दिवगंत बेटे चौधरी सुरेन्द्र सिंह की पत्नी किरण चौधरी, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष डॉक्टर अशोक तंवर, पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल के सुपुत्र कुलदीप बिश्नोई, पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा वर्तमान राज्य सभा सांसद कुमारी सैलजा और कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी तथा पूर्व मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल बताए जाते हैं।
वर्तमान काल में भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की दिल्ली दरबार में अच्छी-खासी पकड़ मानी जाती है। एक तो उनकेे समर्थक विधायकों की संख्या ज्यादा है। दूसरा उनके सुपुत्र सांसद दीपेन्द्र हुड्डा के भी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से काफी प्रगाढ़ सम्बन्ध बताए जाते हैं। जब-जब भी किसी राज्य में विधानसभा चुनाव होते हैं या फिर लोकसभा चुनाव के मौके पर भी दीपेन्द्र हुड्डा अक्सर राहुल गांधी की पब्लिक मीटिंगों की व्यवस्था करने मंे जुटे हुए दिखाई देते हैं।भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली दरबार में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ हरियाणा में किसानों, मजदूरों तथा व्यापारियों के हितों में जनसभाएं और मीटिंग करने का क्रमवार सिलसिला शुरू किया हुआ है। वैसे भी
लोगों से रसूख एवं संसाधन जुटाने के मामले में हुड्डा काफी हैवीवेट नेतामाने जाते हैं। वर्तमान में विधानसभा में कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष किरण चौधरी की पारिवारिक पृष्ठ भूमि काफी मजबूत होने के साथ-साथ दिल्ली दरबार में भी उनकी अच्छी खासी पहचान है। हरियाणा की राजनीति में प्रवेश करने से पूर्व वे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में काफीअहम पदों पर रह चुकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसी लाल के परिवार की सदस्य होने के नाते हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री के असंख्य समर्थकों में से काफी अधिक लोगों का समर्थन किरण चौधरी को अभी भी प्राप्त है।
वर्तमान में हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर बेशक संसाधन जुटाने में दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की तुलना में २१ में से १९ माने जाते हैं लेकिन उन्होंने ने भी आगामी चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी है। पिछले दिनों अम्बाला शहर में रोडवेज कर्मियों के रोष प्रदर्शन में अम्बाला पहुंचकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि वे प्रदेश से जुड़े ज्वलंत मुद्दों मंे बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा सकते हैं। हरियाणा के सर्वाधिक लोकप्रिय रह चुके गैर जाट नेता एवं पूर्वमुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल के सुपुत्र एक बार कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद पार्टी हाईकमान की कृपा दृष्टि से अपनी धर्मपत्नी सहित कांग्रेस में पुनः प्रवेश करके मास्टर स्ट्रोक लगाने का कोई भी सुनहरा मौका गंवाने के मूड में दिखाई नहीं देते। प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली दरबार में भी उनकी पकड़ उल्लेखनीय है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं वर्तमान राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा तो भूपिन्द्र सिंह हुड्डा के मुख्यमंत्री रहते हुए भी अनेक मौकों पर अपना दमखम दिखाने में सफल रह चुकी हैं। वर्तमान में वे भी हरियाणा में किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के हितों में जनसभाएं और मीटिंगें आयोजित करके हरियाणा में अपनी मजबूत पकड़ दिखाने मंे अन्य नेताओं से पीछे नहीं दिखाई देती। हरियाणा के जाने-माने कांग्रेसी एवं किसान नेताचौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला के सुपुत्र रणदीप सिंह सुरजेवाला का सम्बन्ध बेशक नरवाना- कैथल से है लेकिन उनकी पहचान राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक मृदुभाषी, मिलनसार, सुलझे हुए, परिपक्व और प्रतिष्ठित कानूनविद् कांग्रेसी नेता के रूप में बनी हुई है। दिल्ली दरबार से उनकी नजदीकियां जगजाहिर हैं क्योंकि अनेक मौकांे पर वे कांग्रेस के लिए संकटमोचक सिद्ध हो चुके हैं। पंजाब में कांग्रेस की शानदार वापसी के बादकांग्रेस के राष्ट्रीय नेता किसी भी सूरत में हरियाणा में २०१९ के चुनाव में सत्ता प्राप्ति का मौका खोना नहीं चाहते। इन्हीं कारणों से दिल्ली दरबार में हरियाणा के मुद्दे पर गहन चिन्तन मंथन चल रहा है कि आखिर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्द्र सिंह की तरह हरियाणा में कांग्रेस के किस नेता पर दांव खेला जाए।