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अब पार्को में पेड़ों के पत्तों व घास-फूस से बनाया जाएगा

बहादुरगढ़:नगर परिषद की ओर से अब पार्काें में पेड़ों की टहनियों व उनके पत्तों तथा घास-फूस को गला-सड़ाकर कंपोस्ट बनाया जाएगा। कंपोस्ट बनने पर इसे पार्काें में ही हरियाली बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाएगा। पत्तों व घास-फूस से कंपोस्ट बनाने के लिए शहर के पाच पार्काें में 10 फीट बाई 10 फीट चौड़े और 2 फीट गहरे गढ्डे खोदे गए है। इन गढ्डों को पहले पत्तों व घास-फूस से भरा जाएगा और फिर पानी व केमिकल आदि से प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत इसका कंपोस्ट तैयार किया जाएगा। पार्काें में हर रोज पैदा होने वाले वेस्ट से कंपोस्ट बनने से कचरा कम होगा। अधिकाशत: इसे जलाया जाता है लेकिन कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन्हें जलाया नहीं जाएगा, जिससे वातावरण भी प्रदूषित होने से बच जाएगा। साथ ही स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान पार्काें में इस तरह के प्रयोग शहर को रैकिंग में अंक दिलाने का काम करेगे।कंपोस्ट एक प्रकार की खाद है जो जैविक पदाथरें के अपघटन एवं पुन:चक्रण से प्राप्त की जाती है। यह जैव कृषि का मुख्य घटक है। कंपोस्ट बनाने का सबसे सरल तरीका है नम जैव पदार्थो (जैसे पत्तिया, बचा-खुचा खाना आदि) का ढेर बनाकर कुछ काल तक प्रतीक्षा करना ताकि इसका विघटन हो जाए। विघटन में कुछ सप्ताह या महीने लगते हैं। उसके बाद वह ह्यूमस में बदल जाता है। कम्पोस्ट बनाने की आधुनिक विधि कई चरणों में पूर्ण होती है और प्रत्येक चरण में जल, वायु एवं कार्बन तथा नाइट्रोजन से समृद्ध पदाथरें को बड़े नपे-तुले ढंग से डाला जाता है।

वर्जन

पार्काें में भारी संख्या में पेड़ों के पत्ते व घास-फूस इकट्ठा हो जाता है। यह कूड़े में ही चला जाता है। प्राय: देखा जाता है कि कई स्थानों पर इसे जला दिया जाता है, जो प्रदूषण फैलाता है। अब इसकी जगह इन पत्तों व घास-फूस से हरी खाद यानी कंपोस्ट बनाया जाएगा, जिसके लिए पाच पार्काें में गढ्डे खोद दिए गए है।