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जल संरक्षण के लिए हर नल से रोकना होगा बहता पानी

कुरुक्षेत्र प्रदेश में जल संरक्षण का संदेश देने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने मुहिम शुरू की है। विभाग की ओर से हर नल पर टेप, हर कनेक्शन वैध योजना शुरू की है। विभाग की ओर से लगातार तीन माह से जागरूकता अभियान भी चलाया गया। योजना के लिए विभाग की ओर से पूरे गांव में 100 प्रतिशत नलों पर टूंटी लगने के बाद पुरस्कार योजना भी चलाई है। विभाग की ओर से पिछले वर्ष में 80 गांवों का लक्ष्य निर्धारित किया था। जिनमें से 33 गांवों में 100 प्रतिशत नलों पर टूंटी लगा दिया गया है।

जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन अशोक खंडुजा ने बताया कि विभाग की ओर से जल संरक्षण अभियान पिछले वर्ष ही शुरू कर दिया गया था। अब जानकारी के अनुसार ग्रामीण स्तर पर पानी के खुले नल काफी पानी बर्बाद करते हैं। जिन पर टूंटी लगाने की योजना शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार गांव में 100 प्रतिशत नलों पर टूंटी लगाने और सभी कनेक्शन को वैध करने के बाद पुरस्कार प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि पुरस्कार गांव की जनसंख्या के अनुसार प्रदान किया जाता है। जिस गांव की जनसंख्या एक हजार है उसे दस हजार और इसी प्रकार पांच हजार या इससे अधिक तक की जनसंख्या वाले गांव को 59 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

लगातार जल दोहन से खतरे की और बढ़ रहा है क्षेत्र

लगातार जल दोहन और लगातार बढ़ रहे ट्यूबलों की संख्या के कारण कुरुक्षेत्र में भूजल की स्थिति काफी ¨चताजनक है। ट्यूबवेलों के अत्यधिक जल दोहन से लगातार भूजल नीचे गिरता जा रहा है। ¨सचाई विभाग एवं कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पूरे प्रदेश में वर्ष 1966-67 में प्रदेश में मात्र 27 हजार 957 ट्यूबवेल थे। मगर वर्ष 2011-12 में यह आंकड़ा सात लाख को पार कर गया। इतने ज्यादा ट्यूबवेलों की मात्रा बढ़ने से प्रदेश में लगातार जल स्तर खिसकना ¨चता का विषय है। अकेले कुरुक्षेत्र में 39 हजार ट्यूबवेलों से हर वर्ष औसतन एक मीटर जल की गिरावट आ रही है। वर्ष 2005 में जिले का भूजल स्तर 24.47 मीटर था, जो अब 34.54 मीटर पर पहुंच चुका है। ऐसे में यदि इसी तरह जल दोहन होता रहा तो धरती का भूजल पूरी तरह खाली हो जाएगा। इसलिए जल दोहन रोकने के साथ-साथ जल संचयन की ओर कदम बढ़ाना होगा।