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कचरा जलाकर दूर कर रहे कंपकंपी, खतरे से हैं अनजान

गुरुग्राम: सर्दी का कहर जारी है। लगातार बढ़ती गलन और सर्द हवाओं से पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक बेहाल हैं। घरों से लेकर दुकानों व कार्यालयों तक में बचाव के लिए हीटर जलाए जा रहे हैं। फुटपाथों और दुकानों के बरामदों में रात गुजारने वाले ठंड से बचने के लिए कचरे को अलाव की तरह जलाकर उससे गर्माहट पैदा कर रहे हैं। ये लोग अलाव में पॉलीथिन, स्टॉयरोफोम, टायर जैसी चीजों को भी जला रहे हैं, इससे हवा प्रदूषित हो रही है। कुछ लोग घरों में भी अलाव में प्लास्टिक आदि नुकसानदायक चीजें जलाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार जो लोग अलाव जलाने के लिए कचरा या टायर का प्रयोग कर रहे हैं, वे इसके खतरे से अनजान हैं। इनके जलाने से कई तरह की जहरीली गैसें निकलती हैं जो कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनती हैं।

चूल्हा जलाने के लिए जलाते हैं प्लास्टिक की बोरी

निर्माण कार्य करने वाले जगह-जगह बसे अस्थायी मजदूरों के परिवार भोजन बनाने के लिए लकड़ी का प्रयोग करते हैं, लेकिन उसे जलाने के लिए शुरुआत में केरोसिन ऑयल की जगह प्लास्टिक की बोरी का प्रयोग करते हैं। कई जगह प्लास्टिक की बोरी, कचरे से उठाए गए स्टायरोफोम की प्लेट ओर टायर जैसी चीजें अलाव के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। ये चीजें ज्वलनशील होती हैं, इस कारण इनका प्रयोग ज्यादा होता है।

कूड़े को जलाने से कई जहरीली गैसें निकलती हैं जो हवा को प्रदूषित कर देती हैं और कैंसर जैसी बीमारियां को जन्म देती हैं। प्लास्टिक के जलाए जाने से टॉक्सिक गैसें निकलती हैं। इसमें नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, वोलाटाइल ऑरगेनिक केमिकल और पोलीसाइकिल ऑर्गेनिक मैटर शामिल होते हैं। प्लास्टिक जलने से हैवी मेटल्स और टॉक्सिक केमिकल जैसे डाईऑक्सिन भी निकलते हैं, जो काफी हानिकारक होते हैं। ठंड से बचाव के लिए लोग अलाव में प्लास्टिक, टायर जैसी चीजों का प्रयोग बिल्कुल ना करें।

- डॉ. संजय मेहता, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट, एक्टिविस्ट व्हाई वेस्ट योअर वेस्ट

टायर और प्लास्टिक तो बिल्कुल ही नहीं जलाया जाना चाहिए। लकड़ी की तुलना में यह एक हजार गुना ज्यादा नुकसानदायक है। जो लोग टायर, प्लास्टिक स्टायरोफोम जला रहे हैं, उन्हें जागरूक करना चाहिए। ऐसी चीजें जलाने से वोलोटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड और जहरीली गैसें निकलती हैं। यह कैंसर की वजह बन सकती है। वैसे भी शहर में धूल और धुआं ज्यादा है। प्रदूषित हवा के कारण हर साल श्वास रोगियों की संख्या बढ़ रही है।