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गेस्ट टीचरों का मामला लोकसभा में गूंजा

 दिल्ली, 4 जनवरी: हिसार से इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला ने लोकसभा में गेस्ट टीचरों को नियमित करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षक को गुरु का दर्जा प्राप्त है, सरकार ने उनको गेस्ट बनाने का काम किया है, ऐसे में शिक्षा का स्तर कैसे बेहतर होगा? जब तक शिक्षक के ऊपर नौकरी जाने की तलवार लटकी रहेगी तब तक वह अच्छी परफॉर्मेंस नहीं दे सकता। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि हरियाणा ही नहीं पूरे देश में जितने भी गेस्ट टीचर लगे हुए हैं उनको एक पॉलिसी बना कर नियमित किया जाए ताकि शिक्षा का स्तर और अधिक अच्छा हो।
युवा सांसद ने मानव संसाधन विकास मंत्री से मांग की कि इन गेस्ट टीचरों के लिए जिन्होंने 5 साल या इससे अधिक सेवाएं सरकारी स्कूलों में दी हैं, उनको चाहे सर्व शिक्षा अभियान के तहत या अन्य किसी पॉलिसी के तहत नियमित किया जाए। उन्होंने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि देश के भिन्न-भिन्न प्रदेशों में सरकारी शिक्षक लगाने की बजाय अनुबंध के आधार पर टीचर भर्ती किए जा रहे हैं। हरियाणा में इनको जहां गेस्ट टीचर कहा जाता है तो राजस्थान में शिक्षामित्र के नाम से जाना जाता है इसी तरह देश के अन्य प्रदेशों में अलग अलग नाम से गेस्ट टीचरों को जाना जाता है। सांसद चौटाला ने कहा कि नियमित शिक्षक जहां 40000 तक की सैलरी प्राप्त करते हैं वही गेस्ट टीचर को मात्र 18 से 21000 रुपए मिलते हैं। उन्होंने कहा कि नियमित शिक्षकों के बराबर मेहनत करने के बाद भी गेस्ट टीचर को अपनी नौकरी जाने का भय हमेशा रहता है जिसका असर शिक्षा पर भी पड़ता है।
युवा सांसद ने लोकसभा में आंकड़े रखते हुए भी कहा कि हरियाणा में नियमित शिक्षक न होने के कारण शिक्षा का स्तर गिरा है। यहां तक कि प्रदेश में 30 स्कूल ऐसे हैं जहां का रिजल्ट शून्य प्रतिशत रहा है। शिक्षा के स्तर में आई इस गिरावट से प्रदेश के बच्चों का भविष्य दांव पर है। देश व प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह अनिवार्य है कि केंद्र सरकार तुरंत एक पॉलिसी बनाए और उस पॉलिसी के तहत देशभर के गेस्ट टीचरों को नियमित किया जाए।