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देश के विकास में उर्जा क्षेत्र का अहम योगदान: राजीव मेहता

पानीपत, 4 जनवरी:  देश के विकास में उर्जा क्षेत्र का अहम योगदान रहा है लेकिन बढ़ती जनसंख्या की बढ़ती उर्जा की मांग और घटते उर्जा के परम्परागत स्त्रोतों के कारण देश के सभी प्रबुद्ध नागरिकों को जहां उर्जा की बचत करने और नए उर्जा के स्त्रोत तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है, यदि धान की पराली व गन्ने की सूखी पत्ती और शहरी क्षेत्र से निकलने वाले ज्वलनशील कचरे से बिजली अथवा एथनॉल बनाया जाए तो बड़े पैमाने पर उर्जा की पूर्ति करने में ये सभी क्षेत्र सहायक सिद्ध हो सकते हैं। वहीं बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने में भी सहयोग मिल सकेगा। प्रदेश सरकार ने हरेड़ा के माध्यम से इन सभी क्षेत्रों का सदुपयोग करने का निर्णय लिया है। 
अतिरिक्त उपायुक्त राजीव मेहता के अनुसार हरियाणा सरकार सौर उर्जा को बढावा देने के अलावा धान की पराली व गन्ने की सूखी पत्ती और शहरी क्षेत्र से निकलने वाले ज्वलनशील कचरे से बिजली अथवा एथनॉल बनाने जैसे कार्यक्रमों को आगे बढाने के लिए गम्भीरता से विचार कर रही है। इस योजना के तहत ऐसे उद्योगों व ताप बिजली परियोजनाओं व बड़े सार्वजनिक उपक्रमों का सर्वे करवा रही है जहां सौर उर्जा को बढावा देने के अलावा धान की पराली व गन्ने की सूखी पत्ती और शहरी क्षेत्र से निकलने वाले ज्वलनशील कचरे से बिजली अथवा एथनॉल बनाकर उसकी खपत को बढाया जा सकता है। इसके लिए किसानों का भी सहयोग लिया जाएगा ताकि वे धान की पराली को ना जलाएं। प्रदेश के बायोमास उर्जा संयत्रों में लगभग 1.75 लाख टन कचरे का ईस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें धान, सरसों, कपास और गन्ने के अवशेषों को शामिल किया जाएगा।