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खजाने में 2000 करोड़ पर श्रमिकों को एक शेड के लाले

गुरुग्राम श्रम विभाग से संबंधित भवन व अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में लगभग 2000 करोड़ जमा हैं, लेकिन साइबर सिटी के श्रमिकों को एक शेड भी नसीब नहीं। सर्दी हो, गर्मी हो या बरसात, हर मौसम में श्रमिक खुले आसमान के नीचे खड़े होने को मजबूर हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान सैकड़ों श्रमिक सर्दी की चपेट में आ चुके हैं। इसके बाद भी औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के अधिकारी आराम की नींद में सोए हुए हैं।बता दें कि भवन व अन्य निर्माण क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकतर श्रमिक भूतेश्वर मंदिर, सेक्टर पांच, सेक्टर 56 एवं मानेसर स्थित श्रमिक चौराहों पर सुबह-सुबह एकत्र होते हैं। यहीं से सभी काम पर निकलते हैं। यदि किसी को श्रमिक चाहिए तो यहीं से आसानी से उपलब्ध होते हैं। दस साल पहले प्रदेश की कांग्रेस सरकार में श्रम मंत्री रहे एसी चौधरी ने सभी श्रमिक चौराहों पर शेड बनाने की न केवल घोषणा की थी बल्कि चौराहों का दौरा भी किया था। शेड के नजदीक ही श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच के लिए शिविर लगाने की भी घोषणा की थी। कहा था कि निदेशालय के स्वास्थ्य शाखा के अधिकारी स्वयं समय-समय पर शिविर लगाकर श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे। चौधरी का कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन सुविधाएं हासिल नहीं हुईं। इसके बाद पंडित शिवचरण लाल श्रम राज्यमंत्री बनें। उन्होंने भी कई बार घोषणाएं कीं लेकिन काम एक इंच भी आगे नहीं आगे बढ़ा। वर्तमान सरकार का इस दिशा में ध्यान ही नहीं है।

हमलोगों ने ही शहर को बनाया लेकिन हमारा ही ध्यान नहीं

श्रमिकों को कहना है कि उन लोगों ने ही इस शहर को बनाया है। भवनों से लेकर सड़कों का निर्माण किया और लगातार कर रहे हैं लेकिन श्रम विभाग के मंत्री से लेकर अधिकारी तक ध्यान देने को तैयार नहीं। कांग्रेस सरकार के दौरान जो श्रम मंत्री थे वे एक-दो बार परेशानी जानने के लिए भी पहुंचे थे लेकिन वर्तमान सरकार के अधिकारी तक श्रमिक चौराहों के नजदीक दिखाई नहीं देते हैं। श्रमिक राजकुमार, हरदयाल, प्रभुनाथ, जयशंकर, मनोज, रामचंद्र एवं राजनाथ ने बताया कि जबसे सर्दी शुरू हुई तबसे प्रतिदिन काफी संख्या में श्रमिक बीमार हो रहे हैं। सुबह-सुबह बहुत सर्दी रहती है। शेड न होने से बचाव नहीं हो पाता है।

भवन व अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में लगभग 2000 करोड़ रुपये जमा हैं। इसमें लगभग आधी राशि गुरुग्राम जिले से जमा है। इसके बाद भी श्रमिकों के लिए सुविधाएं उपलब्ध न कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। निदेशालय की स्वास्थ्य शाखा के अधिकारियों को चाहिए वे श्रमिक चौराहों के नजदीक शिविर लगाकर श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच करें।