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नेताओं के बंगलों से भीड़ हटी, कोचिंग सेंटरों पर बढ़ी

 रेवाड़ी: स्थान-ब्रास मार्केट के सामने स्थित नेहरू पार्क। गुनगुनी धूप में सैकड़ों युवा अलग-अलग टोलियों में बैठे हैं। कुछ पढ़ाई में व्यस्त हैं तो कुछ गपशप में। सामने ही ब्रास मार्केट हैं, जहां एक दर्जन से अधिक को¨चग सेंटर हैं। एक टोली में बैठे कुछ युवकों से संवाद शुरू हुआ तो युवकों ने बताया कि वे सामने ही एक को¨चग सेंटर में पढ़ रहे है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अधिक भीड़ का सवाल करते ही तीन युवक एक साथ बोले। हम खंडोड़ा गांव के हैं। हमारे गांव में तीन ऐसे युवक इस बार पुलिस में लगे हैं, जिनकी कोई सिफारिश नहीं थी। अब तो नौकरी के लिए पढ़ना पड़ेगा। यही वजह है कि नेताओं के बंगलों से भीड़ हटने लगी है और को¨चग सेंटरों पर बढ़ने लगी है। युवकों की बात में दम है, क्योंकि पुलिस में पिछले दिनों हुई भर्ती के बाद तो को¨चग सेंटरों की संख्या में और भी इजाफा होने लग गया है।

मंत्री व विधायक इस बदली हुई परिस्थिति में चैन से हैं। सूत्रों के अनुसार उनके पास साक्षात्कार के लिए तो सिफारिश पहुंच रही है, लेकिन परीक्षा पास करवाने की न मंत्री गारंटी ले रहे हैं न विधायक न सत्तारूढ़ दल के विधायक। यह ऐसा बड़ा बदलाव है, जिसने युवाओं को पढ़ने के लिए मजबूर किया है। को¨चग सेंटर तो पहले भी थे तथा आइएएस व एचसीएस जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पूरा जोर लगाया जाता था, लेकिन इससे निचले पायदान की नौकरी के लिए मंत्रियों व विधायकों के यहां भीड़ जुटती थी