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छह हजार रुपये के पार पहुंचे ईंट के भाव, महंगा हुआ निर्माण

रेवाड़ी: आशियाना बनाने की तैयारी कर रहे परिवारों की उम्मीदों पर ईंटों के बढ़ते भाव पानी फेर रहे हैं। एनसीआर में चलने वाले ईंट भट्टो पर जिग-जैग सिस्टम की अनिवार्यता की वजह से ज्यादातर ईंट भट्टे चल नहीं पा रहे हैं तथा जो चले हैं उनकी संख्या चंद है। ऐसे में कभी चार हजार रुपये में मिलने वाली बेहतर क्वालिटी की ईंटों के भाव छह हजार रुपये प्रति हजार तक जा पहुंचे हैं। इसकी वजह से निर्माण सेक्टर पर भी इसका असर काफी अधिक नजर आ रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पिछले वर्ष आदेश जारी करके एनसीआर के अधीन आने वाले जिलों में चलने वाले ईंट भट्टों पर सितंबर 2016 तक जिग-जैग सिस्टम की अनिवार्यता लागू की थी। सितंबर की तिथि तय करने के बावजूद भी तय तिथि तक कोई भट्टा संचालक जिग-जैग सिस्टम नहीं लगवा पाया। इसकी वजह से सितंबर से नवंबर माह तक ईंट भट्टे बंद रहे जिसकी वजह से ज्यादातर ईंट भट्टो का स्टॉक समाप्त हो गया तथा अभी तक बेहद कम ही ईंट भट्टे चालू हो पाए हैं जिससे ईंटों की कीमत 6 हजार रुपये प्रति हजार से नीचे नहीं आ रही है। भट्टा संचालकों ने बताया कि फिलहाल जिले में मौजूद 118 ईंट भट्टों से लगभग 20 ही भट्टे चालू हो पाए हैं जिसके कारण कीमतों में कमी नहीं आ रही है। कीमतों में कमी नहीं होने की वजह से आम लोगों के लिए ईंट की व्यवस्था भी कर पाना मुश्किल हो रहा है जिसकी वजह से भवन निर्माण करना भी मुश्किल हो रहा है।