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खाद किल्लत पर भड़के किसान, नारेबाजी की

चरखी दादरी :किसानों को पर्याप्त खाद मुहैया करवाने के सरकारी दावों में धरातल पर दम नजर नहीं आ रहा। एक तरफ सरकार के नुमाइंदे कह रहे हैं कि खाद के गोदाम भरे हैं दूसरी ओर किसान सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं खाद की कमी, वितरण में तकनीकी खामियों के अलावा बैग वितरण में अधिकारियों, कर्मचारियों की मनमानी किसानों के लिए भारी परेशानी का कारण बनी है। बुधवार को भी दादरी की पुरानी अनाज मंडी स्थित दी जमींदारा कोपरेटिव सोसायटी में किसान खाद लेने पहुंचे। यहां पर्याप्त खाद नहीं मिलने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने यहां खाद वितरण में उनके सामने आने वाली समस्याओं से अधिकारियों, कर्मचारियों को अवगत कराया। लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे भड़क गए। क्षुब्ध किसानों ने कहा कि वे पिछले कई दिनों से खाद केंद्र के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मुश्किल से उनकी बारी आती है तो एकाध बैग ही मिलता है। किसानों को पर्याप्त खाद नहीं दी जा रही। कभी आधार कार्ड तो कभी अन्य दिक्कतों के चलते किसान बैरंग लौटने को मजबूर हैं। मशीन में अंगूठों का मिलान न होने से घंटों तक लाइनों में खड़े किसानों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। किसान जयप्रकाश, सुरेंद्र, हवा ¨सह, उमेद, धर्मपाल फौजी, रामकिशन, सुबे ¨सह इत्यादि ने कहा कि सरकार एवं विभाग के पर्याप्त खाद के दावे खोखले हैं। गोदामों में बैग भरे होने की बातें कागजी लग रही हैं। किसान पैक्सों के चक्कर लगा रहे हैं। अलसुबह कड़ाके की ठंड में आकर खाद केंद्रों पर लाइनों में लगते हैं और तीन-चार घंटों बाद मुश्किल से दो या तीन बैग ही मिलते हैं जबकि जरूरत इससे ज्यादा की होती है। पर्याप्त खाद नहीं मिलने से किसानों में फसलों को लेकर ¨चता बनी हैं। किसानों ने कहा कि जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध होनी चाहिए। उधर अधिकारियों का कहना है कि खाद की कमी नहीं है। किसानों को सुचारु रूप से वितरण किया जा रहा है। डिमांड के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ दिक्कतें कई बार अंगूठे मिलान में आती हैं।