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खाकी बाबा मंदिर में श्रीराम जन्मोत्सव मनाया

भिवानी : खाकी बाबा मंदिर में चल रहे श्रीराम कथा के तीसरे दिन बुधवार को श्रीराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। रामलला के जन्म पर पीले वस्त्र धारण कर पहुंचे सभी श्रद्धालुओं ने मंगल गीतों पर नाच गाकर उनके जन्म की खुशियां मनाई। श्रद्धालुओं से खचाखच भरें खाकी बाबा मंदिर को बुधवार को विशेष तौर पर सजाया गया था। भगवान का चतुर्भुज रूप में प्राकट्य और फिर माता कौशल्या के आग्रह पर शिशु रूप में अवतरण की भव्य झांकी के दर्शन ने समस्त धर्मावलंबियों को भाव-विभोर कर दिया। इस मौके पर कथा वाचक गुरू मा चैतन्य मीरा ने श्रद्धालुओं को श्रीराम के अलौकिक अवतरण की कथा सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरू मा ने कहा कि भगवान विष्णु ने असुरों का संहार करने के लिए राम रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाएं। तभी से लेकर आज तक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मोत्सव पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने की परम्परा रही है। उन्होंने कहा कि भक्तों को भगवान का सगुण रूप प्रिय है। इसलिए माता कौशल्या ने जब नौवीं तिथि को जब भगवान चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। जो सारे ब्रह्मांड में समाया हुआ है वो मेरे गर्भ से निकला है। भगवान ने मां को दिव्य रूप दिखाया। अब भगवान चाहते हैं कि मां के अंदर वात्सल्य प्रेम जगे। क्योंकि मनु और शतरूपा ने तप करके वर मांगा था कि आप पुत्र रूप में हमारे घर आओ। तब मनु ने कहा था कि मुझे ध्यान नहीं रहे कि आप भगवान को बस पुत्र रूप में जबकि शतरूपा ने भगवान के दिव्य रूप को देखने के लिए कहा था। साथ ही कहा था कि जब आप आओ तो मुझे एक बार ये बोध होना चाहिए कि मेरे यहां जो आए हैं वो भगवान हैं। इसलिए भगवान चतुर्भुज के रूप में प्रकट हुए। जब भगवान को मां ने जी भर कर देख लिया तो भगवान मुस्कुरा दिए और तब मां कौशल्या की बुद्धि बदल गई और उन्होंने चतुर्भुज भगवान को शिशु रूप धारण करने का आग्रह किया था। माता का आग्रह सुनकर भगवान राम ने बाल रूप धारण कर रोना शुरू किया और अपनी प्रिय बाल लीलाओं से समस्त जनों को आनंदित किया। श्रीराम कथा के दौरान अनेक श्रद्धालुगण उपस्थित रहें।