News Description
किसानों को जोखिम मुक्त करेगी भावांतर योजना

कैथल, 3 जनवरी : जिला के सब्जी उत्पादक किसानों को जोखिम मुक्त करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने भावांतर भरपाई योजना शुरू की गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य सब्जी काश्तकारों को जोखिम मुक्त करना है, जिसके तहत अगर किसान की फसल तय न्यूनतम समर्थन मुल्य से कम दाम पर बिकती है तो उसकी भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इस योजना में टमाटर व आलु के लिए 400 रुपए प्रति क्विंटल, प्याज और फूल गोभी के लिए 500 रुपए प्रति क्विंटल संरक्षित मुल्य निर्धारित किया गया है। 

जिला उपायुक्त  सुनीता वर्मा ने बताया कि भावांतर भरपाई योजना से किसानों को सीधा लाभ होने के साथ-साथ फसलों के विविधिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। आमतौर पर किसान परम्परागत खेती के तहत गेहूं और धान की फसलों पर ही जोर देते हैं, लेकिन इस योजना को प्रोत्साहन मिलने से किसानों का रूझान सब्जियों की खेती की तरफ होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के लागू होने से किसानों की आमदनी सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें फसलों की बिक्री से होने वाले संभावित घाटे से निजात मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस योजना की निगरानी तथा मोनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर मोनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है, जिसकेे तहत उपायुक्त की अध्यक्षता में इस कमेटी के सदस्यों में उप निदेशक कृषि, नाबार्ड के जिला प्रबंधक, जिला उद्यान अधिकारी, जिला राजस्व अधिकारी, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के डीएमईओ सदस्य सचिव होंगे। किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए उद्यान विभाग द्वारा जिला के किसानों के बीच में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। 

उपायुक्त ने बताया कि इस योजना के तहत 4 फसलों पर 48 हजार रुपए से 56 हजार रुपए प्रति एकड़ आमदनी सुनिश्चित की जाएगी तथा योजना के तहत 4 सब्जियों टमाटर, प्याज, आलु और फूलगोभी के लिए संरक्षित मुल्य निर्धारित किया जाएगा। मंडी में निर्धारित अवधि के अंदर सब्जी के कम दाम में बिकने पर वैबसाईट  बीबीवाई पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत किसानों को संरक्षित मुल्य तक भाव के अंतर की सरकार द्वारा भरपाई की जाएगी। इस योजना का लाभ भूमि मालिक, पट्टेदार या किराए पर काश्तकार लेने वाले पात्र होंगे। इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए किसान को बिजाई अवधि के दौरान मार्किटिंग बोर्ड की वैबसाईट पर बागवानी भावांतर पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा।