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बुजुर्गो को टेंशन दे रही पेंशन प्रक्रिया

 करनाल जिला समाज कल्याण विभाग में रोजाना सैकड़ों बुजुर्गों की भीड़ उमड़ती है। एक ही शिकायत कि बार-बार फार्म भरने के बाद भी उनकी पेंशन नहीं बन रही। कुछ बुजुर्ग तो फार्म को गुम करने तक के आरोप लगाते हैं। सीधे तौर पर इसके लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराया जाता है। दैनिक जागरण ने पड़ताल की कि आखिर इसमें सच्चाई कितनी है। शुरुआती जांच में सामने आया कि अधिकतर पेंशन धारकों को विभागीय प्रक्रिया के बारे में जानकारी ही नहीं है। 30 प्रतिशत लोग सीएससी पर फार्म ऑनलाइन कराने के बाद उसकी हार्ड कॉपी विभाग के कार्यालय में जमा नहीं कराते। जबकि इसके बिना पेंशन नहीं बनती। जब तक इसका पता चलता है तब तक फार्म रिजेक्ट हो जाता है। अप्रैल के फार्म अब तक विभाग के पास आ रहे हैं। जबकि तीन महीने में इन्हें रद कर दिया जाता है। हर महीने जिले से करीब 300 लोग पेंशन के लिए आवेदन करते हैं। इनमें से करीब 200 फार्म बुढ़ापा पेंशन के होते हैं। जागरण आपको बता रहा है कि बुढ़ापा पेंशन लेने के लिए क्या करें।

जानिए कहां-कहां से गुजरता है फार्म

सबसे पहले फार्म लेकर उसे भरने के बाद ग्रामीण आवेदक सरपंच व शहरी लोग पार्षद से वैरीफाइ कराएं। इसके बाद सीएससी पर ऑरिजनल दस्तावेज स्कैन कराने होते हैं। यहां से पेंशन का फार्म वेबसाइट पर आनलाइन हो जाता है। सीएससी से स्लिप जरूर लें। 30 प्रतिशत लोग यहां से आगे नहीं जाते और फार्म रिजेक्ट हो जाते हैं। जबकि इसके बाद हार्ड कॉपी जिला समाज कल्याण विभाग के सेक्टर-12 स्थित कार्यालय में क्लर्क को जमा करानी होती है। अपने ऑरिजनल दस्तावेज यहां भी साथ रखें। इसके बाद विभाग का काम शुरू हो जाता है।

कार्यालय में इन पड़ावों को करना पड़ता है पार

सीएससी में आनॅलाइन होते ही क्लर्क व बैंक व यूजर में फार्म आएगा। फिर डी¨लग हैंड और अंत में डीएसडब्ल्यूओ के यूजर में इसे परखा जाएगा। यहां से सिलेक्ट होते ही आईडी बन जाएगी। यहां से स्वत: ही आईडी बैंक खाते से अपलोड हो जाएगी। पहले पेंशनधारक को बैंक खाते से आइडी अपलोड करानी पड़ती थी। हां साइट में दिक्कत है तो मैनुअल ऐसा करना पड़ेगा।

अगस्त तक के फार्म रिजेक्ट

सीएससी के बाद कार्यालय में जमा नहीं कराने वालों के फार्म तीन महीने के बाद रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। विभाग ने अगस्त तक के फार्म को रद कर दिया है। जबकि अक्टूबर तक के आवेदन कंप्लीट हो चुके हैं। दिक्कत इसलिए बढ़ रही है कि कुछ लोग सरपंच व अन्य जनप्रतिनिधियों को फार्म सौंप देते हैं।

हकीकत यह भी : रिकवरी से बचने के लिए बार-बार भर रहे फार्म

पेंशन नहीं बनने की बात करने वाले अधिकतर पेंशनधारक ऐसे हैं जो रिकवरी से बचने के लिए बार-बार फार्म भर रहे हैं। रिकवरी नहीं देते इसलिए उनकी पेंशन नहीं बन पाती। विभाग ने वर्ष 2014 में समय से पहले पेंशन लेने वाले जिले के 27 हजार लोगों की पेंशन बंद कर दी थी। इन पर 18 करोड़ की रिकवरी थी। हालांकि इसमें से करीब आधी राशि ब्याज सहित लोगों ने जमा कराकर अपनी पेंशन बहाल करवा ली है।

असल दस्तावेजों को स्कैन करना नई बात नहीं

जिला समाज कल्याण विभाग से पेंशन लेने के लिए ऑरिजनल दस्तावेजों को स्कैन कराना नई बात नहीं है। जनवरी 2015 से ऐसा चल रहा है। पहले एनआइसी में इन्हें स्कैन किया जाता था। जनवरी 2017 से जिले में स्थित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर यह सुविधा उपलब्ध है। पहले बीडीओ व स्थानीय निकायों के सेक्रेटरी इन्हें वैरीफाई करते थे। अब जिला समाज कल्याण अधिकारी ही वैरीफिकेशन कर देते हैं।

2700 ने आधार जमा नहीं कराया

बीते साल विभाग ने 16803 पेंशनधारकों की पेंशन आईडी से आधार ¨लक नहीं होने के कारण पेंशन रोक दी थी। इनमें से 14103 ने आधार ¨लक करा दिया है। जबकि 2700 अभी तक नहीं आए। कुछ के नाम आधार व पेंशन आईडी में अलग मिले।