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यूरोप के 'संतनिओ' गांव की तर्ज पर होगा खेड़ला का पुनरुत्थान

नूंह : क्षेत्र की बेरोजगारी व अशिक्षा को दूर करने के लिए जिला मुख्यालय से सटे गांव खेड़ला का पुनरुत्थान इंडोनेशिया के रेनबो व यूरोप से संतनिओ गांव की तर्ज पर किया जाएगा। इसके लिए डोनेट एन आवर संस्था के स्वयंसेवी गांवों की दीवारों को विभिन्न प्रकार के रंगों से रंग रहे हैं। यह कदम जिले में पर्यटन की संभावना को देखते हुए उठाया गया है।

राजधानी दिल्ली से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर बसे नूंह जिले में अरावली क्षेत्र के अलावा पांच सौ वर्ष पुरानी हजरत शेख मूसा, पांडवकालीन नल्हेश्वर व झिर मंदिर, कोटला झील सहित कई तरह की संभावनाएं है। ऐसे में संस्था के वालंटियर आगामी 26 जनवरी तक गांव की 7 गलियों को विभिन्न प्रकार का रंग देकर साफ व स्वच्छ बना रहे हैं। जिससे आने वाले समय में गांव की हर गली को केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत मिशन, सभी त्योहार, देश के राष्ट्र पक्षी, पशु सहित महापुरूषों को दीवारों पर स्थान दिया जाएगा। खास बात यह है, कि पेटिंग में होने वाले खर्च का वहन स्वयं ग्रामीण करेंगे। जिससे आने वाले समय में उम्मीद की जा सकती है, कि खेड़ला गांव भी पर्यटकों के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा। इस कार्य में जिला प्रशासन भी सहयोग कर रहा है।

संस्था के स्वयंसेवी बताते है, कि कुछ लोग नूंह जिले को पिछड़ा कहते है, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर लोगों के लिए रोजगार मिल जाएगा तो निश्चित ही उनकी समस्याएं खुद ही समाप्त हो जाएंगी। गांव को सप्तरंग मिलने व साफ-सफाई होने से यहां पर पर्यटक आएंगे। जिससे ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा।