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ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटा डीयू का छात्र संगठन

डबवाली: भारत गांवों में बसता है। किताबों में पढ़ते हैं, नेताओं की जुबान बोलती है। ग्रामीण आंचल में बसे लोगों के लिए क्या-क्या योजनाएं चल रही हैं, इसके बारे में अकसर चाय की चुस्कियों के साथ चर्चा होती है। लेकिन योजनाएं धरातल पर लागू नहीं होती। नेता न सही, ऐसी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों का एक ग्रुप काम कर रहा है।

तीन वर्ष तक राजस्थान के जिला टोंक के गांव सोढा में पहुंचकर ग्रामीणों को जागरुक करने के बाद छात्र हरियाणा के जिला सिरसा के गांव अहमदपुर दारेवाला में गतिविधियां चला रहे हैं। योजनाओं के साथ-साथ सामाजिक जागरुकता लाने का काम हो रहा है। यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं तो गांव में मेडिकल नशा भी हावी है। छात्र डोर-टू-डोर जाकर बुराइयों के खिलाफ ग्रामीणों को जागरुक करके, उनकी आदतें छुड़ा रहे हैं। जून 2017 में 18 छात्र-छात्राएं गांव में पहुंची थी तो इस बार सर्दियों की छुट्टियों में 12 लोग पहुंचे। सरकारी स्कूल में रात काटी। इस दौरान जो भी पैसा खर्च किया, वह अपनी जेब से किया। 14 दिन तक गांव में जाकर जागरुक करने के बाद टीम आज वापस लौट गई।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राएं बीए, बीबीए, बीएससी कर रहे हैं। किसी के पिता बिजनसमैन हैं तो किसी के आइएएस ऑफिसर हैं। सभी उत्तर प्रदेश, कश्मीर, उड़ीसा, आसाम से संबंधित हैं। ये छात्र वर्ष 2014 में यूनिवसिर्टी की चार छात्राओं द्वारा बनाई गई सामाजिक संस्था अस्मत से जुड़े हुए हैं। अस्मत के बैनर तले गांव अहमदपुर दारेवाला में कार्य हो रहा है।

ये छात्र बैंक में अकाऊंट खोलने से लेकर उसमें पैसे जमा या निकलवाने के बारे में जानकारी दे रहे हैं। महिलाओं से उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां सांझी करते हैं। खेल-खेल में बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं