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निजी अस्पतालों के डॉक्टर्स की हड़ताल से मरीज हलकान

सोनीपत : निजी डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। एक तरफ नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में हड़ताल पर रहे निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के कारण मरीजों का इलाज नहीं हुआ, वहीं नागरिक अस्पताल में स्टाफ कर्मियों की बैठक के कारण मरीजों को इलाज के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी।

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव है। इसे करने के बाद वे मॉडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे। इसका विरोध शुरू हो गया। मंगलवार को जिले के सभी निजी अस्पताल व नर्सिंग होम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले हड़ताल पर रहे।

अस्पताल संचालकों ने गेट के बाहर सूचना पत्र भी चस्पा किया था। डॉक्टरों ने सेक्टर 14 स्थित अग्रसेन भवन में एकत्रित होकर बिल के खिलाफ रोष जताया। आइएमए के जिला प्रधान डॉ. महेश गुप्ता ने कहा कि इस बिल में ऐसे प्रावधान हैं, जिससे आयुष डॉक्टर को भी मॉडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की अनुमति मिल जाएगी। जबकि इसके लिए कम से कम एमबीबीएस होना चाहिए। इससे नीम-हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जाएंगे।

डॉक्टरों ने हड़ताल सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक बुलाई गई थी, लेकिन लोकसभा में बिल पास न होने के कारण इसे करीब पांच बजे ही वापस ले लिया।

निजी अस्पतालों की हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक निजी अस्पताल में आपातकालीन मरीज को भर्ती नहीं किया गया। वहीं नागरिक अस्पताल में भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। गांव शहजानपुर निवासी राजकुमार को मंगलवार आपसी झगड़े में सिर पर काफी चोटें आई। परिजन उसे लेकर लघु सचिवालय रोड स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे। राजकुमार का आरोप है कि वहां के स्टाफ ने हड़ताल की बात कह उसका इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद परिजन उसे लेकर नागरिक अस्पताल में पहुंचे। यहां भी स्टाफ कर्मियों की एक बंद कमरे में बैठक चल रही थी।

आपातकालीन कक्ष में दो कर्मचारी तो थे, लेकिन वहां उसके सिर पर पट्टी कर रोहतक पीजीआइ के लिए रेफर कर दिया। जब मीडिया कर्मियों ने मामले में दखल दिया तो राजकुमार के टांके भरे गए और जांच की गई।