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गांव सहरावन में टोल प्लाजा बनाने को लेकर पेच

गुरुग्राम गांव सहरावन में दिल्ली-जयपुर हाईवे पर टोल प्लाजा बनाने का मामला खटाई में पड़ सकता है। ग्रामीणों के साथ ही वन विभाग की वन्य जीव शाखा भी नहीं चाहती है कि यहां टोल प्लाजा बने। शाखा अपनी ओर से एनओसी नहीं देगी। सभी का एक सुर में कहना है कि जहां पर टोल प्लाजा बनाने की बात चल रही है, वहीं से अरावली पहाड़ी क्षेत्र के वन्य जीव हाईवे पार करते हैं। टोल प्लाजा बनने से न केवल वन्य जीवों का रास्ता बंद हो जाएगा, बल्कि वाहनों के शोर से आसपास अरावली पहाड़ी क्षेत्र डिस्टर्ब हो जाएगा। क्षेत्र अशांत होने से वन्य जीव भागने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे स्थित खेड़कीदौला टोल प्लाजा को मानेसर की तरफ आठ किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने की घोषणा गत वर्ष केंद्रीय भूतल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कर चुके हैं। घोषणा के मुताबिक गांव सहरावन में दिल्ली-जयपुर हाईवे पर टोल प्लाजा बनना है। इसके लिए 60 एकड़ से अधिक जमीन की आवश्यकता है जिसे जिला प्रशासन ने देने का निर्णय ले लिया है। ग्रामीणों का तर्क है कि पूरी दुनिया में वन्य जीवों की रक्षा करने को लेकर आवाज उठ रही है।

खनन कार्य रुकने के बाद अरावली पहाड़ी क्षेत्र में वन्य जीवों की संख्या बढ़ी है। जिन इलाकों में अधिकतर वन्य जीव रहते हैं उनमें मानेसर व सहरावन का अरावली क्षेत्र भी शामिल है। टोल प्लाजा बनने से इलाके में शोर अधिक होगा। इससे वन्य जीव भागने के लिए मजबूर हो जाएंगे। वन्य जीवों की रक्षा के लिए टोल प्लाजा गांव सहरावन में बनाने की बजाय बिलासपुर में बनाया जाए। हालांकि इस बारे में एनएचएआइ के निदेशक (प्रोजेक्ट) एके शर्मा का कहना है कि जहां पर टोल बनाया जाएगा उसके नीचे पुलिया का भी प्रावधान कर दिया जाएगा।