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81 पंचायतों ने किया भ्रष्टाचार, वसूली नहीं कर पाए अधिकारी

फतेहाबाद: भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस का दावा करती है, लेकिन यह दावा धरातल पर सही नहीं है। यदि ऐसा होता तो कभी के पंचायती राज विभाग के अधिकारी निलंबित हो जाते। उनको तो विभाग ने भी दोषी मान लिया था, लेकिन कार्रवाई करने के नाम पर चुप्पी साध लेते है। कितनी बड़ी ¨वडबना है कि कई जांच हुई, प्रत्येक में रही, दोषी मानें गए, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। दरअसल, पिछले प्लान में पंचायतों को सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट जारी किया। पंचायतों को अधिक रुपये मिलने पर विकास कार्य कम और भ्रष्टाचार अधिक हुआ। फतेहाबाद जिले के पांच ब्लाक की 81 पंचायतों ने आरसीसी बेंच खरीद कर करीब ढाई करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार किया। इन पंचायतों के तत्कालीन मुखियाओं व ग्राम सचिवों को जांच में दोषी भी माना गया, लेकिन उसके बाद न तो रिकवरी हुई न ही विभागीय कोई अन्य कार्रवाई। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार करने वाली पंचायतें कोर्ट में चली गई है। इसलिए रिकवरी नहीं हुई। जबकि उसी विभाग के अधिकारी मानते है कि सिर्फ 8 पंचायतों ने ही टोहाना की स्थानीय अदालत में याचिका दायर की है। 3 पंचायतों ने पूर्ण रिकवरी दी है, 14 ने आंशिक। यानी अभी भी 56 पंचायतों के तत्कालीन मुखियाओं ने न तो पूरी रिकवरी जमा करवाई न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही।

--नोटिस पर नहीं दे रहे जवाब, कोर्ट में कौन याचिका दायर करें

पंचायती राज विभाग के सूत्रों की मानें तो उनका कहना है कि रिकवरी के लिए पूर्व सरपंच को नोटिस कई बार भेज दिए। नोटिस के आधार पर कुछ सरपंचों ने रिकवरी जमा करवा दी है। जिन्होंने नहीं करवाई, उनके खिलाफ कौन अधिकारी कोर्ट में जाकर अपील करें। भ्रष्टाचार करने वाले सरपंच दूसरी बार सरपंच नहीं बने। कुछ तो शैक्षणिक योग्यता के चलते बाहर हो गए। एकाध ने चुनाव लड़ा तो जनता ने उन्हें हरा दिया।