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शहीद गुरसेवक को भूले अफसर-राजनेता, मां-बाप हुए भावुक

अंबाला : पठानकोट एयरबेस के जाबांज गरूड़ कमांडर शहीद गुरसेवक ¨सह के शहीदी दिवस को जिला प्रशासन और राजनेता भूल गए हो गए हैं। अंबाला के गांव गरनाला में उनके शहीदी दिवस पर का जिला प्रशासन और कोई राजनेता नहीं पहुंचा। गुरसेवक के पिता सूच्चा ¨सह और उनकी पत्नी अमरीक कौर ने गुरसेवक के गांव की पंचायत, स्कूल के बच्चों और डीएवी कॉलेज से आए अध्यापकों और विद्यार्थियों ने मिलकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी है। जिला प्रशासन की इस भूल के चलते गुरसेवक के परिवार को गहरा धक्का लगा है।

शहीद गुरसेवक के गांव में मंगलवार सुबह करीब 10 बजे स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ शिक्षक और गांव की पंचायत एकजुट हुई। इसके बाद करीब पौने 11 बजे शहीद गुरसेवक के पिता सूच्चा ¨सह अपनी पत्नी के साथ शहीद गुरसेवक ¨सह सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहुंचे। जहां पर शहीद की प्रतिमा के समक्ष बच्चे और शिक्षक लाइनों में खड़े हुए थे। जैसे ही शहीद के मां-बाप मौके पर पहुंचे तो लोगों ने शहीद गुरु सेवक के शहीदी के लिए नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद सूच्चा ¨सह ने अपनी पत्नी के साथ और बाद में पंचायत, स्कूल और कॉलेज के शिक्षकों ने गुरुसेवक की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। शहीद के पिता-मां दोनों ही मौके पर भावुक भी हो गए।

नारे लगाकर बच्चों ने किया जागरुक

शहीद के पिता सूच्चा ¨सह ने बताया कि उसके जाबांज और देश के लिए अपनी जान को न्योछावर करने वाले का जिला प्रशासन इतना जल्दी भूल जाएगा उसका उसे अंदाजा नहीं था। उसके पास किसी नेता और जिला प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। बच्चों ने श्रद्धांजलि के बाद गांव में एक रैली निकाली और जब तक सूरज चांद रहेगा गुरसेवक तेरा नाम रहेगा.. के नारे लगाए गए।

आंतकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे गुरसेवक

2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले में अंबाला के गांव गरनाला में रहने वाले गुरसेवक ¨सह शहीद हो गए थे। शहीद गुरसेवक ¨सह ने 10वीं कक्षा तक राजकीय विद्यालय गरनाला से शिक्षा प्राप्त करने के बाद एसए जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल अंबाला शहर से 12वीं की थी। स्कूली शिक्षा के बाद गुरसेवक डीएवी कॉलेज अंबाला शहर से उच्च शिक्षा हासिल की थी। एनसीसी भी ज्वाइन कर देश की सेवा करने की मन में ठानी थी। मंगलवार को स्कूल और कॉलेज ने उनकी शहीदी दिवस पर उन्हें पुष्प अर्पित कर याद किया।