News Description
सफाई पर मी¨टग में 31 में से पहुंचे 11 पार्षद, सीवरेज ओवरफ्लो की उठाई समस्या

जींद : शहर में चार जनवरी से शुरू हो रहे स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर पार्षद भी गंभीर नहीं हैं। सर्वेक्षण से पहले सफाई पर मंथन के लिए सोमवार सायं डीआरडीए के सभागार में हुई बैठक में एक-तिहाई पार्षद शामिल नहीं हुए। जबकि नगरपरिषद प्रशासन ने दो बार पार्षदों का न्योता दिया था। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदीप कुमार, सुशासन सहयोगी शुभी केसरवानी, चेयरपर्सन पूनम सैनी की जगह उनके पति और 11 पार्षद ही शामिल हुए।

बैठक में मौजूद पार्षदों ने सफाई व्यवस्था के साथ-साथ शहर की सीवरेज व्यवस्था पर का मुद्दा उठाते हुए जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वार्ड नौ से पार्षद गुलशन ने कहा कि शहर में सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह से फेल है। जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो हैं। निकासी के लिए प्रशासन के पास कोई मास्टर प्लान नहीं है और न ही धरातल पर कोई काम हो रहा है। मी¨टग तो कई बार हो चुकी हैं, लेकिन काम कुछ नहीं हो रहा। वहीं बैठक में मौजूद पार्षदों ने सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। पार्षदों ने कहा कि नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों का टोटा है। वार्डों में कई-कई दिन तक सफाई नहीं हो पाती है। नगर परिषद की सीमा बढ़ गई, लेकिन सफाई कर्मचारी घट गए। रिटायर हुए कर्मियों की जगह नहीं भर्ती नहीं की गई और जो नए कर्मी आए हैं, उन्हें आउटसोर्सिंग पर भर्ती किया गया। अगस्त में सफाई का ठेका पूरा हो चुका है। चार माह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद दोबारा ठेका नहीं हो सका है।

-----------------

कभी-कभार होते हैं सफाई कर्मियों के दर्शन

कई पार्षदों ने कहा कि उनके वार्ड में सफाई कर्मचारियों के दर्शन कभी-कभार होते हैं। पार्षदों ने कहा कि नगर परिषद के पास 256 कर्मचारी हैं, जो शहर की आबादी के हिसाब से बहुत कम हैं। इनमें से भी 111 आउटसोर्सिंग पर लिए गए हैं। पार्षदों ने कहा कि शहर की आबादी के हिसाब से 500 सफाई कर्मियों की जरूरत है।

---------------

सीवरेज का रैं¨कग पर पड़ेगा असर

शहर में जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो रहते हैं। इससे रानी तालाब, ¨हदू कन्या कॉलेज के सामने व अन्य शहर के मुख्य स्थानों पर सीवर ओवरफ्लो होने से सड़क पर पानी भर जाता है। यह शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नेगेटिव प्वाइंट है, जिससे रैं¨कग को नुकसान हो सकता है।

----वर्जन-----

वार्डों में सफाई सुधारने के लिए पार्षद अहम भूमिका निभा सकते हैं। पार्षदों को पता होता है वार्ड में कौन गंदगी फैलाता है और उन्हें किस तरह मोटिवेट करना है। सभी पार्षदों को दो बार मी¨टग की जानकारी दी गई थी, लेकिन 11 ही पहुंच पाए। बैठक में मौजूद पार्षदों को स्वच्छ एप के बारे में जानकारी दी गई।