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असहाय मरीजों के जख्मों पर सहयोग की सिलाई

हिसार :60 वर्षीय राजेंद्र पाल तनेजा। पेशा टेल¨रग। पहचान गरीब और असहाय मरीजों के लिए मसीहा। सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है कि टेलरिंग का काम करने वाला इंसान भला किसी की कैसे मदद कर सकता है। लेकिन नागरिक अस्पताल आने वाले हर गरीब को यह मालूम है कि राजेंद्र पाल तनेजा उनके लिए मसीहा से कम नहीं हैं। राजेंद्र ने अस्पताल के अंदर दो अलमारियां रखवाई हुई हैं, जिनमें गरीबों के लिए ऑपरेशन सामग्री से लेकर भिन्न- भिन्न प्रकार की दवाएं मौजूद हैं। जब भी असहाय लोगों को आर्थिक तंगी के कारण इलाज की कमी से जूझना पड़ता है तो उनकी जुबान पर बस तनेजा का ही नाम आता है।

राजेंद्र पाल बताते हैं कि 1981 में जब वे घर बैठे थे तो उनके पास दोस्त तिलक राज आए और उन्होंने अपने पड़ोस में रहने वाले तीन असहाय बच्चों की व्यथा सुनाई। तिलक ने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले एक घर के मुखिया की मौत हो गई, जिस कारण घर में रहने वाले तीन बच्चे भूख से ऐसे तिलमिलाए कि उनका दिल पसीज गया। यह सुनकर राजेंद्र पाल तनेजा ने खुद एक बोरी अनाज खरीदा और उन असहाय बच्चों के यहां पहुंचा दिया। बच्चों की हालत देख वह खुद को रोक नहीं सके और वहीं प्रण लिया कि वे इलाज के अभाव में किसी भी गरीब को मरने नहीं देंगे।

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चिट बनाकर देते हैं तो फ्री हो जाते हैं अल्ट्रासाउंट

राजेंद्र पाल के कार्यो की चर्चा ऐसे फैली कि शहर का हर एक डाक्टर भी उनके सेवाभाव के कायल हो गए। उनमें से एक हैं शुभम अल्ट्रासाउंट के संचालक डा. राजीव भाटिया। राजेंद्र ने बताया कि एक बार वे अल्ट्रासाउंट करवाने के लिए शुभम अल्ट्रासाउंड क्लीनिक पर गए तो वहां के डा. राजीव भाटिया ने उनसे पैसे लेने से मना कर दिया। कारण पूछा तो पता चला कि वे भी उनके कार्यो में हाथ बंटाना चाहते हैं। जिसके बाद उन्होंने फैसला किया कि राजेंद्र पाल तनेजा जिस नाम की चिट बनाकर उनके क्लीनिक में भेजेंगे, उनका अल्ट्रासाउंट निशुल्क होगा।

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राजेंद्र पाल की एक ही शर्त, आपका बच्चा स्कूल जाएगा, तभी मिलेगी मदद

राजेंद्र पाल तनेजा ने बताया कि वे जिस भी व्यक्ति या फिर महिला की मदद करते हैं तो उनकी एक ही शर्त होती है कि उनका बच्चा हर हाल में स्कूल जाना चाहिए। ताकि भविष्य में परिवार की तरह यह बच्चा भी आर्थिक तंगी के दलदल में न फंसे। रोजगार के अभाव में कल का भविष्य अशिक्षा के जहर से दम न तोड़े। इसलिए वो अपनी दहलीज पर आए हर जरूरतमंद को बच्चे को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

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आर्थिक तंगी से जूझ रहे मरीजों को ये देते हैं सुविधाएं

नागरिक अस्पताल में आने वाले हर जरूरतमंद की वे पैसे से लेकर हर तमाम सुविधा मुहैया करवाकर मदद करते हैं, जिनमें सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंट, महंगी दवाओं से लेकर ऑपरेशन में यूज होने वाले महंगे उपकरण तक शामिल हैं।

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मासूमों के लिए दूध की भी करते हैं व्यवस्था

1983 में वे किसी कारणवश हिसार के नागरिक अस्पताल में आए। लेकिन वहां की व्यवस्था देखी तो वे हक्के-बक्के रह गए। उन्होंने देखा कि नर्सरी वार्ड में दाखिल मासूमों का इलाज राम-भरोसे चल रहा है। आसपास मौजूद लोगों से बातचीत कर पता लगा कि वे गरीब परिवारों के बच्चे हैं, जिस कारण उनकी खास देखरेख नहीं हो पाती। यह सुनकर उनसे रहा न गया और तुरंत अस्पताल से चले गए। लेकिन अगली सुबह नई किरण और नई उम्मीदों के साथ वे उठ खड़े हुए और पांच किलोग्राम दूध लेकर सीधे नागरिक अस्पताल पहुंच गए। वहां उन्होंने मासूमों के परिजनों को दूध उपलब्ध कराया।

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इन पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं राजेंद्र पाल

- 2007 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा ने उनके कार्यो के लिए अवार्ड आफ ऑनर से नवाजा गया।

- 2007 में तत्कालीन उपायुक्त ने भी अवार्ड आफ ऑनर से नवाजा

- 2007 में ही तत्कालीन आइटी कमिश्नर ने भी पुरस्कार दिया।

- 2014 में आइजी शत्रुजीत कपूर ने भी राजेंद्र पाल को पुरस्कार से नवाजा