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विरोध से बचने के लिए अल्पसंख्यक पार्षदों को बनाया सामान्य श्रेणी का

रोहतक : वार्डबंदी के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी के पार्षदों की नगर निगम ने जातियां ही बदल दी हैं। 19 दिसंबर को वार्डबंदी के लिए गठित कमेटी में पांच पार्षदों को जातियों के हिसाब से लिया गया था। जातियों के हिसाब से पार्षदों के नाम तय होने की खुद पुष्टि डीसी ने बैठक के बाद की थी। फिलहाल एससी व बीसी जातियों को छोड़कर कमेटी में शामिल तीन दूसरे पार्षदों की जातियों में बदलाव कर दिया गया है।

दूसरे विरोधी पार्षदों का दावा है कि विरोध से बचने के लिए निगम प्रशासन ने यह खेल किया है। फिलहाल जाट, पंजाबी और अल्पसंख्यक पार्षदों की जातियों के बजाय सामान्य जाति का पार्षद घोषित कर दिया है। हाल ही में पार्षदों के घर जो पत्र भेजे गए हैं, उसमें जातियों के बजाय सामान्य जाति के पार्षद बनाने का जिक्र है। यहां बता दें कि शहरी चेत्र में कुल 20 पार्षद हैं, लेकिन पांच पार्षदों को कमेटी में शामिल किया गया था। जिन पार्षदों को कमेटी में शमिल नहीं किया गया था, उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई थी।

बेशक नगर निगम प्रशासन ने नाराजगी से बचने के लिए जाट, पंजाबी और अल्पसंख्यक पार्षदों की जातियों में बदलाव करके इन्हें सामान्य श्रेणी के पार्षद बता दिया हो, लेकिन कुछ पार्षदों की नाराजगी थम नहीं है। इनेलो के पार्षद नए सिरे से आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। अभी इनेलो शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों को बाहर किया जाएगा कि कुछ दिन और फैसला रोका जाएगा, इस ¨बदु पर निगाह रखे हुए है। पार्टी के बड़े नेताओं का भी मशविरा मिल चुका है।

जल्द ही आंदोलन की रणनीति तैयार होगी। वहीं, पंजाबी और सैनी समाज के पार्षदों में भी इस प्रकरण में गुस्सा है। दूसरे पार्षदों का कहना है कि नाराजगी से बचने के लिए सब हो रहा है।