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गुरु का आदेश मानने वाला प्राप्त कर सकता प्रभु की कृपा : स्वामी ज्ञानानंद

 श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के सदस्यों ने स्थानीय रामलीला भवन में व्यास पूजा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने श्रद्धालुओं को गुरु और शिष्य के महत्व के बारे में बताया। वहां पहुंचने पर उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।

इस व्यास पूजा के मांगलिक अवसर पर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा और श्रद्धालुओं ने अपने गुरु के चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि जीव के जन्म से ही सर्वप्रथम उसकी माता उसकी गुरु होती है। जो उसे शिक्षा का पहला अध्याय पढ़ाती है। जीव को पूर्व जन्म के संचित कर्मो के कारण ही आध्यात्मिक गुरु मिलता है। जो प्राणी को आध्यात्मिक शिक्षा देता है। जो उसे अंधकार से निकाल कर प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा यदि शिष्य का गुरु के प्रति विश्वास पक्का है, तो गुरु दूर होने पर भी उसके पास होता है। जो गुरु की कही बात को नहीं मानता, वह कभी भी प्रभु कृपा प्राप्त नहीं कर सकता। इसके उपरांत कृष्ण कृपा संकीर्तन मंडल के रसिकों ने गुरुदेव की महिमा भजनों के माध्यम से गाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया। इस मौके पर समिति प्रधान जितेंद्र गुप्ता, अमरनाथ बंसल, प्रवीण गोयल, अनिल गर्ग, हनुमान प्रसाद गोयल, राकेश ओबराय, कृष्ण लाल छाबड़ा, एडवोकेट केवल कृष्ण सैनी, योगेश दत्त, संजीव बग्गा, नीरू, नीरज, बंटी, अनिल छाबड़ा, रामकुमार, अंबिका गोयल आदि थे।