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छह दिन बाद परिवार सहित लौटा दलित परिवार

पानीपत: दबंगों पर धमकी देने का आरोप लगाकर परिवार सहित घर छोड़ देने वाले दलित शिमला मौलाना के समे सिंह सोमवार को पुलिस के पहरे में छह दिन बाद परिवार समेत घर लौट आए। उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस ने गनमैन सिपाही प्रवीण को लगा रखा है। थाना सदर प्रभारी हरभजन सिंह ने समे सिंह व उसके परिजनों को भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं रहेगी। अगर उन्हें किसी तरह का खतरा है तो तुरंत बताएं। गांव में शांति का माहौल बनाए रखें। समे सिंह ने कहा कि अब उसे व उसके परिवार को कोई दिक्कत नहीं है। अगर कोई कुछ कहेगा तो पुलिस प्रशासन को अवगत करा दूंगा।

27 दिसंबर 2017 को समे सिंह पहले डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन से मिले और फिर आरोप लगाया कि पंचायत ने उसे व उसके परिवार को 7 जनवरी 2018 तक गांव छोड़ने का फरमान सुनाया है। वे परिवार सहित गांव छोड़कर पंट्टीकल्याणा में बड़े भाई के घर चले गए थे। 28 दिसंबर को गांव में सरपंच पिंकी की अगुवाई में पंचायत हुई। तब पंचायत ने आरोप बेबुनियाद बता कर कहा गया कि समे सिंह गांव लौटे आए उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। 29 दिसंबर को पुलिस ने समे सिंह को गनमैन मुहैया करा दिया गया। सोमवार को अखिल भारतीय खेत मजदूर संगठन के राजेंद्र, दलित अधिकार मंच के जिला संयोजक दयानंद पंवार और सेवानिवृत कैप्टन राजेंद्र सारसर समे सिंह, उनकी पत्नी निर्मला, बेटे अरविंद, पुत्रवधू महेंद्रो, पोत्री वेदिका और योगिता को लेकर शिमला मौलाना पहुंचे। मौके पर थाना सदर से छह पुलिसकर्मी पहुंचे और उन्होंने आसपास गश्त भी की।

शिमला मौलाना गांव में जनवरी 2014 में सतबीर फौजी की पत्नी दर्शना की हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्याकांड के आरोपी अमित, अमित की मां और समे सिंह के बड़े बेटे प्रवीण को गिरफ्तार किया। इसके बाद ही समे सिंह ने आरोप लगाया कि पंचायत ने उसे व उसके परिवार को गांव छोड़ देने का फरमान सुनाया है।