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परीक्षाओं के नाम पर सुहाग चिह्न उतरवाना गलत : जसवंत रेढू

करनाल : हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में सुहाग चिह्न उतरवाना गलत है। यह सरासर नारी के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। इस मामले पर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए तुरंत प्रभाव से इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। शिक्षाविद जसवंत रेढू ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह शिकायत की है।

उन्होंने कहा कि इन परीक्षाओं में नारी गौरव, गरिमा, सम्मान व उनकी धार्मिक आस्था पर करारी चोट होती है। हम तमाशबीन बनकर केवल देखते हैं। हमारे अपने देश में ही परीक्षा के नाम पर महिलाओं के मंगलसूत्र, सुहाग चूड़ा, कंगन, अंगूठी, कोका, चूड़ियां, वे¨डग ¨रग, हेअर पिन, हेअर क्लिप, ¨बदी, बालियां व कड़े तक उतरवा दिए जाते हैं।

पत्र में ऐसे बयां की पीड़ा

मैं एक जागरूक नागरिक के तौर पर यह विषय आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं। अभी हाल ही में पड़ोसी राष्ट्र पाकिस्तान द्वारा भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त कमांडर कूलभूषण जाधव की माता व धर्मपत्नी के साथ जिस प्रकार अशिष्टता पूर्ण एवं शर्मनाक व्यवहार विदेशी भूमि पर किया गया। ठीक उसी प्रकार का दु‌र्व्यवहार स्वदेशी भूमि पर हरियाणा सरकार के अंतर्गत हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (पंचकूला) द्वारा आयोजित विभिन्न पदों की भर्ती परीक्षाओं व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (भिवानी) द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में महिलाओं के साथ नियमवत रूप से परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के समय आए दिन किया जा रहा है। मैं इस कुचेष्ठा पर विशेष रूप से आपका व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।

हरियाणा में सरकारी स्तर पर आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में अविवाहित कन्याओं व विवाहित स्त्रियों के शरीर से वह सभी धारित प्रतीक जो उनकी आस्था एवं धार्मिकता से संबंधित हैं। जिनमें मंगलसूत्र, सुहाग चूड़ा, कंगन, अंगूठी, कोका, चूड़ियां, वे¨डग ¨रग, हेअर पिन, हेअर क्लिप, ¨बदी, बालियां एवं कड़े इत्यादि मुख्य रूप से शामिल हैं, उपरोक्त सरकारी संस्थाओं द्वारा अनुबंधित तलाशी टीम के सदस्यों द्वारा परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय जबरन उतरवा लिए जाते हैं। अन्यथा परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है। जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। महिलाओं को परीक्षा केंद्रों पर तैनात तलाशी टीम एवं सुरक्षा स्टाफ की मनमानियां झेलनी पड़ती हैं।

स्थिति के हिसाब से नारी गरिमा की परिभाषा बदलना कहां तक सही

पत्र में आगे लिखा है कि यह विषय गंभीरतापूर्वक विचारणीय है कि क्या स्थान एवं स्थिति परिवर्तन की अवस्था में नारी गरिमा की परिभाषा बदल जाती है? हरियाणा सरकार का उद्देश्य निसंदेह नकल मुक्त परीक्षाओं के आयोजन का रहता है। परीक्षाओं की पवित्रता को बचाना हमारा नैतिक दायित्व भी है, लेकिन नैतिकता की रक्षा के लिए अनैतिक तौर तरीके नहीं अपनाएं जाने चाहिए। हैरत इस बात की है कि जो पवित्र प्रतीक नकल में किसी भी सूरत में सहायक नहीं हो सकते।

केंद्र व प्रांतीय सरकारों को जारी करें निर्देश

पत्र में कहा गया कि सरकारी प्रबंधन द्वारा अनुबंधित तलाशी टीम सदस्यों द्वारा जबरन, अत्यंत असंवेदनशीलता से नारी मन की पीड़ा समझे बगैर उतरवा लिया जाता है। विवाहित स्त्रियों की सुहागन स्थिति विधवा स्थिति तुल्य बना दी जाती है। आपसे अनुरोध है कि न सिर्फ हरियाणा बल्कि पूरे भारत वर्ष में इस अमानवीयता, अशिष्टता, असंवेदनशीलता पूर्ण शर्मनाक नियम को तुरंत बंद करवाने के लिए केंद्र व प्रांतीय सरकारों को जरूरी निर्देश देने का कष्ट करें। क्योंकि यह औचित्य विहीन नियम नारी गौरव, गरिमा, सम्मान, उनकी धार्मिक आस्था व हमारी पारम्परिक संस्कृति को चोट पहुंचाने वाला है। भारतीय संसद भी एकमत से इस प्रकार के शर्मनाक अमानवीय व्यवहार की घोर ¨नदा कर चुकी है।