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अनुबंध की पहली ही शर्त पर खरी नहीं उतरी डायलिसिस यूनिट

झज्जर : किडनी के रोगियों को सामान्य अस्पताल में इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्थापित की जाने वाली डायलिसिस यूनिट पहली ही शर्त पर खरी नहीं उतरी। 31 दिसंबर से पहले यूनिट को तैयार किया जाना था। लेकिन न तो इस यूनिट के लिए फिलहाल तक बिजली और पानी का कनेक्शन हो पाया है और न ही कंपनी की तरफ से मशीनें स्थापित की गई है। स्वास्थ्य विभाग को फिलहाल यह भी जानकारी नहीं है कि यह यूनिट कब तक तैयार हो पाएगी। शहर में स्थित सिविल अस्पताल में पीजीआइ जैसी सुविधाएं किडनी के रोगियों को उपलब्ध कराने की योजना अधर में लटकी हुई है। दिसंबर के प्रथम सप्ताह में पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस यूनिट को खोलने के लिए कंपनी के अधिकारियों व सामान्य अस्पताल के एसएमओ के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो गए थे। अस्पताल भवन के द्वितीय तल पर स्थित परिवार नियोजन वार्ड को निजी कंपनी को अस्पताल प्रशासन की तरफ से सौंप गया था। डायलिसिस यूनिट के खुलने के बाद बाजार से सस्ती दरों पर मरीजों का उपचार किया जाएगा। विभाग के अनुसार 31 दिसंबर से पहले यूनिट को तैयार किया जाना था। झज्जर के सिविल अस्पताल में स्थापित होने वाली डायलिसिस यूनिट के संदर्भ में कंपनी के साथ एमओयू के अनुसार अस्पताल प्रशासन की ओर से जगह, बिजली व पानी उपलब्ध कराया जाना था। इसके बदले कंपनी यहां करोड़ों की लागत से डायलिसिस मशीनें लगाई जानी हैं। साथ ही प्रशिक्षित स्टाफ और इनके रखरखाव का जिम्मा भी कंपनी का होगा।

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वार्ड में रखे केवल बैड

झज्जर के सामान्य अस्पताल में स्थापित की जाने वाली डायलिसिस यूनिट 15 बैड की होगी। इसके लिए इलेक्ट्रोनिक बैड अस्पताल में पहुंच चुके हैं।अब तक केवल ये बैड वार्ड में रखे गए हैं। जबकि बहादुरगढ़ के सामान्य अस्पताल में डायलिसिस यूनिट ने काम करना शुरू कर दिया है।

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पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस यूनिट को खोलने के लिए कंपनी के अधिकारियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हो गए थे। बिजली व पानी के कनेक्शन के लिए दोनों विभागों के कार्यकारी अभियंताओं पत्र लिखा गया है। बाकि काम कंपनी को करना है वे कब तक काम पूरा करेंगे इसके बारे में जानकारी नहीं है। एमओयू पर हस्ताक्षर हुए उस समय कंपनी के अधिकारियों ने 31 दिसंबर से पहले ही काम पूरा करने के लिए कहा था।