News Description
दौलत दोबारा आ सकती है वक्त नहीं : कंवर महाराज

 भिवानी: बीता वक्त कभी वापस नहीं आता। दौलत चली जाए तो दोबारा आ सकती है लेकिन वक्त दोबारा नही आता। साल 2017 का अंतिम दिन और नए साल 2018 का पहला दिन बहुत ही अनमोल साबित हो रहा है। वह इसलिए भी कि आप सब सौभाग्यशाली हो कि साल का अंतिम दिन सत्संग में बिता रहे हो और नए साल के पहले दिन भी बड़ा सत्संग होगा। वक्त की कीमत पहचानो। जिसने वक्ता को पहचान लिया वक्ता उसका भी ध्यान रखता है। राधा स्वामी दिनोद के परम संत भिवानी के सत्संग भवन में सेवादारों को सत्संग के दौरान प्रवचन दे रहे थे। गुरु महाराज ने फरमाया की हमें सबसे पहले खुद की जांच पड़ताल करनी चाहिए। औरो की गलती देखने से पहले स्वयं की गलतियां देखो। ये समझ विवेक से आती है। विवेक से कार्य करना चाहिए। तन से मन से धन से जितनी हम औरों की मदद कर सकते हैं हमें करनी चाहिए। मनुष्य चोला परमात्मा का इनाम है जो हर किसी को नही मिलता। कितनी हैरानी की बात है कि हम ये चोला झगड़े में आनंद में और रस में फंस कर बर्बाद करते हैं। अगर इंसानी चोला मिला है तो हम सत्कर्म करके गुरु की शरण पा कर सत्संग करके इसका लाभ उठाना चाहिए। कंवर साहेब महाराज ने फरमाया कि संत की संगति का एक पल भी बहुत फायदेमंद है। संतों के वचन की पालना करके हमें ये विचार करना चाहिए कि हम भक्ति के लायक हैं। न हम सत्संग के मायने समझते है न उसे अपनाते है। हम सब परमात्मा की संतान हैं। वो अच्छे में भी और बुरे में भी है। उन्होंने कहा कि लोगों का विश्वास पाखंडी लोगों के कारण टूटा है। पूरे गुरु की खोज करो। ये सही है कि संतों की कोई पहचान नही होती लेकिन पूरे गुरु के कुछ लक्षण होते है जो बाहरी रूप से भी प्रकट होते है। जो गुरु अपनी जायदाद बनाता है ऐशो आराम में जीवन बिताता है वो महात्मा नही है। गुरु महाराज ने कहा कि सेवा नि:स्वार्थ भाव से होनी चाहिए। अपने सुख आराम को त्याग कर की गई सेवा भक्ति सबसे बड़ी होती है। सेवा में प्रेम की परख होती है। गुरु दरबार की सेवा से बड़ा कुछ भी नही है। सेवा में ना चतुराई की जरूरत है ना बुद्धि की। आप सत्संग के सेवादार हो इसलिए आप से अपेक्षा और ज्यादा बढ़ जाती है। कंवर महाराज ने कहा कि अपने जीवन को इस तरह बनाओ की आप को देखकर दूसरे भी आपकी राही पर चलना चाहें। सेवा का लाभ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मिलता है। सत्संग वो है जहां नाम की महिमा गाई जाती है। इंसान के जीवन को सामाजिक रूप से और आध्यात्मिक रूप से ऊंचा उठाने का काम सत्संग करता है। संतों के संग में तो जौ की भूसी भी मिल जाए तो उसे मत त्यागो। सत्संग किसी वाणी गाने से या कोई कथा पुस्तक पढ़ने मात्र से ही नही होता बल्कि सत्संग तो हर पल चलता ही रहता है।