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सफाई कर्मियों ने दी धरने की चेतावनी

अंबाला : नया साल का जश्न चल रहा है और कैंटोनमेंट बोर्ड के करीब 200 सफाई कर्मियों में मायूसी का आलम है। अपनी समस्याएं बोर्ड सीईओ को लिखित में देकर कर्मचारी थक चुके हैं लेकिन समाधान 2017 में नहीं हो पाया है। अब कर्मियों को 2018 में उम्मीद रक्षा संपदा पश्चिम कमान चंडीगढ़ के प्रधान निदेशक से बंधी है कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा। इसीलिए सफाई कर्मी लामबंद हो गए हैं और बोर्ड के खिलाफ पटेल पार्क में विरोध जताया है।

कैंटोनमेंट बोर्ड के 20 कर्मचारी ऐसे हैं जिनके वेतन में दो से तीन हजार रुपये का अंतर है। साल 1981 में भर्ती हुए सफाई कर्मी धर्मपाल और अशोक दोनों प्रत्यक्ष उदाहरण बोर्ड के अधिकारियों के सामने हैं। दोनों की भर्ती एक साथ हुई है लेकिन कैंटोनमेंट बोर्ड अशोक को 13 सौ रुपये तो कर्मी धर्मपाल को 19 सौ रुपये के पे-स्केल पर वेतन मिल रहा है। दोनों की सैलरी में दो से ढ़ाई हजार का अंतर है। लिखित के साथ-साथ जन सूचना अधिकार के तहत वह कारण पूछते हैं लेकिन न तो उनकी शिकायत पर उन्हें जवाब मिलता है और न ही सूचना प्रदान की जाती है। इसकी प्रकार छठा पे कमीशन कर्मियों को मिल चुका है और 7वां पे कमीशन लागू हुए दो साल का समय बीत चुका है। लेकिन बोर्ड ने उनको छठा पे कमीशन अपने कर्मियों को नहीं दिया है। बोर्ड की मनमानी का आलम यह है कि निलंबन के बाद जब उनकी बहाली हो जाती है तो उनको कटी हुई एग्रीमेंट नहीं दी जाती। इसके अलावा न तो सफाई कर्मियों को पूरी छुट्टी दी जाती है और घोषित छुट्टी के दिन काम कराया जाता है। अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड इम्पलाइज यूनियन के प्रधान संजय, महासचिव प्रमोद, उप प्रधान कर्मवीर, सचिव रामेश्वर गांधी, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार आदि कर्मियों ने बोर्ड अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है तो वह नए साल में धरना देंगे।

एलए से नहीं कराई जा रही है सर्विस बुक अपडेट

बोर्ड में तैनात सफाई कर्मियों की जो सर्विस बुक है उसे एलए आफिस से हर साल अपडेट नहीं कराया जा रहा है। इसी वजह से कर्मियों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। इसी प्रकार ड्यूटी पर यदि किसी कर्मचारी के साथ अनहोनी हो जाए तो उनको मेडिकल सुविधाएं नहीं दी जाती। सफाई कर्मियों ने कहा कि कर्मचारी अपनी समस्याओं के लिए पत्र लिखते हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता।