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बच्चों के भूखे मरने की दुहाई देकर रेहड़ी-फड़ी वालों ने की नारेबाजी

अंबाला शहर : बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे तो सरकार लगा रही है लेकिन हम अपने बच्चों को कहां से पढ़ाएं और क्या खिलाएं? रोज के 300-400 रुपये रेहड़ी-फड़ी लगाकर कमाते हैं लेकिन एक-दो महीने बाद उन्हें उजाड़ दिया जाता है। इसीलिए अब हालत यह हो गई है कि हमारे बच्चों की फीस भी नहीं भरी जा रही है और उनके नाम तक काट दिए गए हैं। अंबाला शहर में कपड़ा मार्केट में रेहड़ी-फड़ी संचालकों ने रेहड़ी-फड़ी हटाने को लेकर नारेबाजी करते हुए पुलिस प्रशासन और नगर निगम पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। गुस्साए प्रधान रामजी शर्मा, राकेश, शुभम इत्यादि ने कहा कि उनके बच्चे पीकेआर जैन में पढ़ रहे थे लेकिन अब फीस नहीं देने के कारण उन्हें स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। इसी तरह प्रधान रामजी लाल ने कहा कि रेहड़ी-फड़ी मार्केट रजिस्टर्ड है इसके लिए वह बाकायदा सरकार को टैक्स भी दे रहे हैं। बावजूद इसके उन्हें परेशान किया जा रहा है।

हम खुद हटवाते हैं जाम

रेहड़ी-फड़ी संचालकों ने कहा कि पुलिस वाले कहते हैं कि उनकी वजह से जाम लग रहा है लेकिन वह तो डिवाइडर से उस तरफ बैठे हैं ऐसे में हमारे कारण जाम कैसे लग सकता है? नारेबाजी करते हुए उन्होंने आरोप लगाए कि पुलिस कर्मी बाजार में सड़क के बीच खड़े होने वाले वाहनों के तो चालान नहीं काटते लेकिन उन्हें तंग करने लग जाते हैं। जबकि हम तो जाम को खुद खड़े होकर खुलवाते हैं ताकि उनका धंधा भी चौपट न हो।

नहीं बना पाया निगम वेंडर जोन

वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेशभर में नगर निगमों में वेंडर जोन बनाने का ऐलान किया था। निगम को आदेश दिए थे कि जल्द कार्रवाई की जाए। नगर निगम हाउस की बैठक में भी यह प्रस्ताव करीब एक साल पहले पास हो गया छावनी में तो वेंडर जोन के लिए जगह निर्धारित कर दी गई लेकिन शहर में न तो जगह निर्धारित हुई न ही कहीं वेंडर जोन बन पाए। इसी कारण नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा रेहड़ी-फड़ी वालों को उठाना पड़ रहा है। रेहड़ी-फड़ी संचालकों ने छावनी की तर्ज पर शहर में भी रेहड़ी-फड़ी के लिए जगह निर्धारित करने और जब तक जगह नहीं दी जाती रोजी रोटी कमाने के लिए रेहड़ी-फड़ी खड़े रहने देने की अनुमति देने की गुहार लगाई।