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स्वच्छता पर बच्चों ने बेबाकी से दी राय : दुकानदार शहर को गंदा करे तो सामान ही नहीं खरीदें

करनाल स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में अच्छी रैं¨कग के लिए नगर निगम ने कई योजनाएं तैयार की हैं। अधिकतर ऐसी हैं जिनके परीक्षा में अंक हैं। इसलिए ज्यादातर शहरों ने इन पर अमल किया किया। लेकिन करनाल नगर निगम का एक प्रयास लीक से हटकर और शानदार रहा। न तो सर्वेक्षण में इसके अंक मिलेंगे और न ही इसका जिक्र कागजों में होगा। बावजूद इसके इसका महत्व सबसे अधिक है। दरअसल, निगम की पहल के बाद हाल ही में 32 हजार विद्यार्थियों के पोस्टकार्ड आए हैं। बच्चों ने इनके जरिये स्वच्छता पर अपने विचार रखे। अधिकारियों ने इन्हें पढ़ा तो दंग रह गए। छठी से 12वीं कक्षा तक के बच्चों ने जो लिखा वह दिल का छूता है। बच्चों ने बेबाकी से अपनी राय रखी। कहा कि जो दुकानदार डस्टबिन नहीं रखता उससे सामान नहीं खरीदें। स्वच्छता को बोझ नहीं कर्तव्य समझें। कूड़ा सड़क पर दिखे तो खुद ही डस्टबिन में डाल दें। दैनिक जागरण चंद बच्चों के विचारों से पाठकों को रूबरू करा रहा है।

कूड़ा जेब में डाल लें पर सड़क पर न फेंके

प्रताप पब्लिक स्कूल सेक्टर-6 के केशव भारद्वाज ने निगम के पोस्टकार्ड में बड़ी ही गहरी बात लिखी। शक्तिपुरम कालोनी निवासी केशव का मानना है कि आस-पास कूड़ादान नहीं मिले तो कूड़े को जेब या थैले में डाल लें। लेकिन भूल से भी इसे सड़क पर नहीं फेंके। अपने विचारों केवल प्रतियोगिता और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखें। वास्तव में भी कदम उठाएं। स्वच्छता पर अपने विचार और नजरिया बदलें। लगन करें और देश को स्वच्छ बनाएं। स्वच्छता को बोझ नहीं अपना कर्तव्य समझें। फिर देखिए कैसे सूरत बदलती है।

सड़क पर कचरा दिखे तो डस्टबिन में डालें

ओपीएस इंटरनेशल स्कूल के नयन ने लिखा कि यदि आपको सड़क पर कचरा दिखाई दे तो इसे उठाएं और डस्टबिन में डालें। ओपीएस इंटरनेशल स्कूल की छात्रा वंशिता ने लिखा कि हर आदमी अपने घर व दुकानों पर दो डस्टबिन रखे। गीले व सूखे कचरे के लिए अलग-अलग। सड़क पर कचरा कभी नहीं फेंके। खुले में कचरा फेंक कर यदि कोई शहर को गंदा करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाए।

देश हमारा ही तो घर इसे साफ रखें

प्रताप पब्लिक स्कूल की छात्रा खुशी यादव ने लिखा है कि देश हमारा ही तो घर है। इसे साफ रखने की जिम्मेदारी भी तो हमारी बनती है। सप्ताह में एक बार ही सही लेकिन अपने गली व मोहल्लों में सफाई अभियान चलाएं। महात्मा गांधी ने कहा कि था कि आजादी जरूरी लेकिन स्वच्छता की उससे भी अधिक जरूरत है। एसडी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हितेश ने लिखा कि महात्मा गांधी ने कहा कि था कि आजादी जरूरी लेकिन स्वच्छता की उससे भी अधिक जरूरत है।

स्कूल में रोजाना चले सफाई अभियान

दयाल ¨सह पब्लिक स्कूल के छात्र मुकुल ने लिखा कि स्कूल में रोजाना पांच से 10 मिनट तक सफाई अभियान चलाया जाए। ताकि बच्चे जागरूक हो सकें। हर स्कूल में गीले व सूखे कचरे का डस्टबिन होना चाहिए। ई-टॉयलेट का सही रखरखाव हो। हर महीने बैठक आयोजित कर सफाई पर मंथन किया जाए।

आशा है आप हमारे सुझावों को पढ़ेंगे और..

घीड़ गांव की बेटी अदिति गुप्ता ने लिखा है कि जिले के कई गांवों में कूड़ेदान नहीं हैं। गांवों तक यह अभियान पहुंचे। आशा है कि आप बच्चों के सुझावों को पढ़ेंगे और इनमें से अच्छे सुझावों पर अमल होगा। इसके बाद कोई ताकत हमारे शहर को स्वच्छ बनने से नहीं रोक सकेगी।

कुछ जोशिले नारे जो बच्चों ने दिए

नगर निगम को भेजे पोस्ट कार्ड में बच्चों ने खुलकर अपने मन की बातें रखी। कुछ जोशिले नारे भी दिए। स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, सुंदर भारत के अलावा देश हमारा घर, इसे साफ सुंदर रखने की जिम्मेदारी भी हमारी जैसे नारों से जोश भरा। स्वच्छ भारत, स्वच्छ घर का नारा देकर स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 में भागीदारी निभाने की अपील की।