# बयान से पलटे करणी सेना प्रमुख ,पद्मावत देखने से इंकार         # अमेरिका में शटडाउन खत्म, राष्ट्रपति ट्रंप ने साइन किए बिल         # दिल्ली: राजपथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आज, कई जगह मिल सकता है जाम         # सेंसेक्स की डबल सेंचुरी, पहली बार 36000 के पार, निफ्टी ने भी रचा इतिहास         # सीलिंग के विरोध में दिल्ली के सभी बाजार आज रहेंगे बंद         # भारत-पाक बॉर्डर पर तनाव के बीच जम्मू कश्मीर में LOC के आर - पार बस सेवा फिर शुरू         # मिजोरम में शरण लिए म्यांमार के 1400 लोगों का देश लौटने से इनकार         # हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को देना होगा दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र         # हरियाणा के कांग्रेस विधायकों को पार्टी फंड के लिए नोटिस         # दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली करवट, हल्की बारिश से ठंड की वापसी        
News Description
दिल किसी का न दुखाओ, इसमें परमात्मा बसते हैं : स्वामी धर्मदेव

हिसार : जयश्रीराम महिला संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में कुंजलाल गार्डन स्थित जयश्रीराम प्रभात फेरी मंदिर में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के पंाचवें दिन वामन अवतार, कृष्ण जन्मोत्सव व नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा में विशेष रूप से पटौदी से आए स्वामी धर्मदेव महाराज का मंदिर के सेवादारों ने फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया। स्वामी धर्मदेव महाराज ने कहा कि जन्म से लेकर मरने तक हर किसी के अंदर यहां तक कि सोते समय भी काम करने वाले दिल रूपी हृदय ने कभी किसी से कुछ नहीं मांगा। ये बहुत अनमोल चीज है। हमें किसी के दिल को दुखाना नहीं चाहिये, क्योंकि इसमें परमात्मा का भी वास है। उन्होंने कहा कि आज किसी एक से सलाह मांगोगे तो 50 और भी सलाह देने वाले मिल जाएंगे और अगर 50 लोगों से सहयोग मांगोगे तो शायद कोई एक होगा जो सहयोग करेगा। हर व्यक्ति दूसरे को सहयोग करना सीख ले तो इस देश में कोई गरीब न रहे और कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।

वहीं प्रवचन देते हुए आचार्य सुभाष शास्त्री वृंदावन वाले ने कृष्ण जन्म प्रसंग पर नंद के आनंद भयो भजन गाया तो मंदिर प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। शांति नगर के भाईचारा चौक से कथा में पहुंची अनेक महिलाओं ने आचार्य सुभाष शास्त्री का मुकुट पहनाकर स्वागत किया। मंच संचालन ओमप्रकाश असीजा ने किया। मंडल की प्रधान दर्शना चाणना ने बताया कि कथा में समाजसेवी विजय ढल, पुनीत मैनी व मदनलाल बुंदेला ने अतिथि के रूप में भाग लिया। सभी अतिथियों को स्वामी धर्मदेव महाराज ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कथा में एचआर महता, संतलाल म हता, चंद्रभान गांधी, नरेश महता, अमर कुकड़ेजा, गो¨बद मधु, मनोहर लाल नांगरू, घनश्याम पपनेजा, विशनदास सेहरा, सतपाल असीजा, भीम नारंग, कश्मीरीलाल माटा, सुभाष चिलाना, राजकुमार ललित, किशनलाल बागड़ी, बृजमोहन पाहुजा, मदनलाल मदान, चंद्रप्रकाश शर्मा, पं. गोपालचंद शास्त्री, इंद्र झंडई, हरभगवान चाणना, अनिल मलिक, अशोक चिलाना, आसानंद गाबा, गुरदयाल असीजा, चांद भुटानी, संजय गाबा आदि उपस्थित थे।