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टैक्स डिफॉल्टर प्रॉपर्टी की नहीं होगी रजिस्ट्री

अब टैक्स डिफाल्टर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकेगी। तहसील में रजिस्ट्री के वक्त ही रजिस्ट्री की तिथि तक के पुराना बकाया प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा। इसके लिए नगर निगम के क्षेत्रीय कराधान कार्यालय की ओर से निगम कर्मचारियों की नगर निगम क्षेत्र के सभी तहसील कार्यालयों में ड़्यूटी लगाई गई है।

नगर निगम ने ऐसे प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों के लिए हाल ही में एक नई सुविधा की शुरुआत की है। इस बकाया प्रॉपर्टी टैक्स को भरने के लिए संपत्ति मालिकों या संपत्ति के खरीदारों को नगर निगम के चक्कर नहीं काटने होंगे। रजिस्ट्री करने से पहले तहसील कार्यालय में ही एक अस्थायी प्रॉपर्टी आइडी बनाकर बकाया टैक्स का भुगतान किया जा सकेगा। खास बात यह कि अस्थार्यी प्रॉपर्टी का आइकन नगर निगम की वेबसाइट पर भी दिया गया है। जहां से टैक्स भरने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी गई है। ज्यादातर खाली प्लाटों से प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी नगर निगम के लिए आफत बनी हुई है।

करना होगा सेल्फ असेसमेंट

प्रॉपर्टी की कैटेगरी यानी रेजिडेंशियल, कामर्शियल या इंस्टीट्यूशनल के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स का निर्धारण भी खुद ही करना होगा। फॉर्म भरकर यह बताना होगा कि किस तरह की प्रॉपर्टी है। कब से टैक्स बकाया है, इन सबकी जानकारी देनी होगी। टैक्स का निर्धारण करने के अलावा डेकलरेशन यानी दिए गए ब्यौरे का घोषणा पत्र भी देना होगा।

35 हजार खाली प्लाटों पर बकाया है टैक्स

खाली प्लॉटों का टैक्स वसूलना नगर निगम के लिए चुनौती बन गया है। 35 हजार खाली प्लॉटों के मालिकों का रिकॉर्ड नगर निगम के पास भी उपलब्ध नहीं है। इन प्लॉटों की रजिस्ट्री के वक्त ही प्रॉपर्टी टैक्स मिलने की उम्मीद है। इसके लिए बकाया प्रॅापर्टी टैक्स वाली संपत्ति या खाली प्लाट की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। निगम क्षेत्र के गांवों की 42 हजार प्रॉपर्टी का भी टैक्स पिछले कई सालों से बकाया है। खाली प्लॉटों और गांवों की प्रॉपर्टी को मिलाकर करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। बता दें कि नगर निगम को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स मिलता है।

खाली प्लॉटों से इस दर से वसूला जाता है टैक्स

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीअब टैक्स डिफाल्टर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकेगी। तहसील में रजिस्ट्री के वक्त ही रजिस्ट्री की तिथि तक के पुराना बकाया प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा। इसके लिए नगर निगम के क्षेत्रीय कराधान कार्यालय की ओर से निगम कर्मचारियों की नगर निगम क्षेत्र के सभी तहसील कार्यालयों में ड़्यूटी लगाई गई है।

नगर निगम ने ऐसे प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों के लिए हाल ही में एक नई सुविधा की शुरुआत की है। इस बकाया प्रॉपर्टी टैक्स को भरने के लिए संपत्ति मालिकों या संपत्ति के खरीदारों को नगर निगम के चक्कर नहीं काटने होंगे। रजिस्ट्री करने से पहले तहसील कार्यालय में ही एक अस्थायी प्रॉपर्टी आइडी बनाकर बकाया टैक्स का भुगतान किया जा सकेगा। खास बात यह कि अस्थार्यी प्रॉपर्टी का आइकन नगर निगम की वेबसाइट पर भी दिया गया है। जहां से टैक्स भरने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी गई है। ज्यादातर खाली प्लाटों से प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी नगर निगम के लिए आफत बनी हुई है।

करना होगा सेल्फ असेसमेंट

प्रॉपर्टी की कैटेगरी यानी रेजिडेंशियल, कामर्शियल या इंस्टीट्यूशनल के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स का निर्धारण भी खुद ही करना होगा। फॉर्म भरकर यह बताना होगा कि किस तरह की प्रॉपर्टी है। कब से टैक्स बकाया है, इन सबकी जानकारी देनी होगी। टैक्स का निर्धारण करने के अलावा डेकलरेशन यानी दिए गए ब्यौरे का घोषणा पत्र भी देना होगा।

35 हजार खाली प्लाटों पर बकाया है टैक्स

खाली प्लॉटों का टैक्स वसूलना नगर निगम के लिए चुनौती बन गया है। 35 हजार खाली प्लॉटों के मालिकों का रिकॉर्ड नगर निगम के पास भी उपलब्ध नहीं है। इन प्लॉटों की रजिस्ट्री के वक्त ही प्रॉपर्टी टैक्स मिलने की उम्मीद है। इसके लिए बकाया प्रॅापर्टी टैक्स वाली संपत्ति या खाली प्लाट की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। निगम क्षेत्र के गांवों की 42 हजार प्रॉपर्टी का भी टैक्स पिछले कई सालों से बकाया है। खाली प्लॉटों और गांवों की प्रॉपर्टी को मिलाकर करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। बता दें कि नगर निगम को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स मिलता है।

खाली प्लॉटों से इस दर से वसूला जाता है टैक्स

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी