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खेलों में आगे नहीं बढ़ पा रहे खिलाड़ियों के कदम

नूंह: वर्ष 2017 में जिले के कदम खेलों में आगे नहीं बढ़ पाए। यहां खेलों की स्थिति में सुधार करने के लिए सरकार ने प्रयास तो किए लेकिन वे सिरे नहीं चढ़ पाए। खेलों की अनदेखी में खेल विभाग मुख्य भूमिका में रहा। जिला के प्रत्येक खंड में राजीव गांधी स्टेडियम बनाए गए, लेकिन उनमें एक भी खेल प्रतियोगिता नहीं हो पाई। खेलों के लिए स्कूल व कालेज के मैदानों का सहारा लिया गया। हालांकि राजीव गांधी स्टेडियमों की मरम्मत का काम जरूर शुरू हुआ है। बिना साजो सामान के हर बार खिलाड़ियों पर दांव लगाया गया।

जिले में खिलाड़ियों की पौध तैयार करने के लिए सरकार ने यहां प्रशिक्षकों की संख्या जरूर बढ़ाई। लेकिन संसाधनों और जगह के अभाव में ये भी कुछ खास नहीं कर पाए। प्रशिक्षकों को सेंटर तो दिए गए लेकिन वहां पर वे केवल खानापूर्ति करते ही नजर आए।

तत्कालीन सरकार ने जिले में खंड स्तर पर करीब 3 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से राजीव गांधी स्टेडियमों का निर्माण कराया था। नगीना में 47 लाख, पिनगवां में 54 लाख, कामेड़ा में 51 लाख, सिरौली में 57 लाख, कोटा खंडेवला में 55 लाख व झामूवास में 64 लाख रुपये स्टेडियम निर्माण पर खर्च किए गए। लेकिन इन स्टेडियमों को बनने का खिलाड़ियों को कोई फायदा नहीं हुआ। बनने के समय से ही इनमें एक भी प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हो पाया। देखरेख के अभाव में ये स्टेडियम पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं।

जिला खेल विभाग पिछले कई दशकों से अनदेखी का दंश झेल रहा है। नूंह जिला खेल विभाग की तरफ पिछले वर्षों में ना तो सरकारों का ध्यान रहा और ना ही जिला प्रशासन का। हालात हुए कि जिले में खेल सुविधाओं का ग्राफ घटता ही चला गया। भाजपा सरकार ने यहां पांच प्रशिक्षकों का तबादला कर खिलाड़ियों को थोड़ी राहत जरूर दी। लेकिन अब भाजपा सरकार भी जिला खेल विभाग को भूल चुकी है। जिससे यहां ना तो खिलाड़ियों को सुविधाएं मिल पा रही है और ना ही पर्याप्त संसाधन