# बयान से पलटे करणी सेना प्रमुख ,पद्मावत देखने से इंकार         # अमेरिका में शटडाउन खत्म, राष्ट्रपति ट्रंप ने साइन किए बिल         # दिल्ली: राजपथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आज, कई जगह मिल सकता है जाम         # सेंसेक्स की डबल सेंचुरी, पहली बार 36000 के पार, निफ्टी ने भी रचा इतिहास         # सीलिंग के विरोध में दिल्ली के सभी बाजार आज रहेंगे बंद         # भारत-पाक बॉर्डर पर तनाव के बीच जम्मू कश्मीर में LOC के आर - पार बस सेवा फिर शुरू         # मिजोरम में शरण लिए म्यांमार के 1400 लोगों का देश लौटने से इनकार         # हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को देना होगा दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र         # हरियाणा के कांग्रेस विधायकों को पार्टी फंड के लिए नोटिस         # दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली करवट, हल्की बारिश से ठंड की वापसी        
News Description
सेक्टरों में रिहायश हुई महंगी, कागजों में घूम रही घोषणाएं

फतेहाबाद:शहरी विकास से जुड़ा सबसे बड़ा मसला है सफाई समस्या। स्वच्छता मुहिम सरकार के महत्वाकांक्षी एजेंडों में शामिल है। इसी एजेंडे के मद्देनजर सरकार ने घोषणा की थी कि जिले में कचरा प्रबंधन प्लांट लगाया जाएगा। यह प्लांट लग जाता है तो जिले के सभी शहरों का कचरा एक जगह एकत्र किया जा सकेगा और कचरे का प्रबंधन भी किया जा सकेगा। उम्मीद तो यही थी कि वर्ष 2017 में यह प्लांट स्थापित हो जाएगा। लेकिन प्लांट स्थापित होना तो दूर, अभी तक टेंडर भी नहीं हो पाए। नगर परिषद ने टेंडर के लिए आवेदन भी मांग रखे हैं, लेकिन कोई बोलीदाता नहीं मिल रहा। सरकार ने प्लांट की स्थापना को लेकर सितंबर 2017 में टेंडर अपलोड किया था। संभावना थी कि दिसंबर में टेंडर जारी होने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। साढ़े 48 करोड़ रुपये इस प्रोजेक्ट पर खर्च किए जाने हैं। जो कंपनी सबसे कम लागत में काम करेगी, उसे टेंडर दे दिया जाएगा। लेकिन बार बार मौके दिए जाने के बाद भी कंपनियां रुचि नहीं ले रहीं। इसके लिए करीब 30 एकड़ जमीन करीब दो साल पहले ही चयनित कर ली गई थी। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम भी जगह का जायजा ले चुकी थी। लेकिन अब लंबे समय से यह प्रोजेक्ट अटका हुआ था। यह प्रोजेक्ट सरकार के स्वच्छता मिशन का हिस्सा है। मनोहर सरकार ने पूरे प्रदेश को 15 कलस्टरों में विभाजित करते हुए ठोस कचरा प्रबंधन करने के निर्देश दिए थे। इन कलस्टरों में नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका के शहरी इलाकों को शामिल किया गया है।

सिर्फ एक कंपनी ने लिया जायजा