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बच्चा चोरी और गार्ड घोटाला प्रकरण पीजीआइ के लिए बनी आफत

रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान यानि पीजीआइएमएस बीते साल में कुछ गंभीर मामलों को लेकर काफी चर्चाओं में रहा। सितंबर माह में बच्चा चोरी प्रकरण को लेकर पीजीआइ प्रबंधन की खूब फजीहत हुई।

इस मामले में नर्स समेत डाक्टर्स को चार्जशीट का सामना करना पड़ा, तो वहीं निदेशक को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। इसके अलावा 103 गार्ड घोटाला मामले को लेकर भी प्रबंधन को शर्मिदगी उठानी पड़ी। हालांकि अभी तक न तो बच्चे के बारे में कुछ सुराग मिल पाया है और न ही गार्ड घोटाला मामले में जांच किसी नतीजे पर पहुंची है। वहीं दवाईयों की कमी को लेकर भी पीजीआइ प्रबंधन को बार-बार सफाई देनी पड़ी।

पीजीआइ के गायनोकॉलोजी विभाग में पैदा होने के 15 मिनट बाद ही बच्चा चोरी हो जाना प्रबंधन के लिए काला अध्याय साबित हुआ। दस सितंबर को गायनी विभाग में डेयरी मोहल्ला निवासी रंजू ने बेटे को जन्म दिया, तो डाक्टर्स की ओर से सूचना मिली कि बच्चा गायब हो गया। इसके बाद उपजा विवाद आज तक भी गले की फांस बना हुआ है। बच्चे की बरामदगी को लेकर परिजनों ने गायनी विभाग के सामने ही धरना दे दिया और 18 दिन तक खूब हो-हल्ला मचा। बच्चे की बरामदगी न होना पीजीआइ प्रबंधन के लिए भारी मुसीबत बन गई। इस दौरान गायनी विभाग की हेड प्रोफेसर डा. स्मिति नंदा समेत चार नर्स को चार्जशीट कर दिया और एक स्टाफ नर्स बलजीत कौर को निलंबित कर दिया। इसके अलावा परिजनों की ओर से बच्चा चोरी प्रकरण को लेकर निदेशक को पद से हटाने की मांग की। प्रबंधन ने इस मामले में कदम उठाते हुए निदेशक डा. राकेश गुप्ता को हटा दिया। पुलिस ने भी इस मामले में जांच करने के लिए रात-दिन मेहनत की, लेकिन बच्चे का सुराग पाने में पूरी तरह से असफल रही।

पुलिस की पूछताछ भी प्रबंधन के लिए भारी पड़ गई और सभी रेजीडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए। उन्हें मनाने में भी चार दिन का समय लगा और इसके बाद ही पीजीआइ में मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी पर लौट सकी।