# बयान से पलटे करणी सेना प्रमुख ,पद्मावत देखने से इंकार         # अमेरिका में शटडाउन खत्म, राष्ट्रपति ट्रंप ने साइन किए बिल         # दिल्ली: राजपथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आज, कई जगह मिल सकता है जाम         # सेंसेक्स की डबल सेंचुरी, पहली बार 36000 के पार, निफ्टी ने भी रचा इतिहास         # सीलिंग के विरोध में दिल्ली के सभी बाजार आज रहेंगे बंद         # भारत-पाक बॉर्डर पर तनाव के बीच जम्मू कश्मीर में LOC के आर - पार बस सेवा फिर शुरू         # मिजोरम में शरण लिए म्यांमार के 1400 लोगों का देश लौटने से इनकार         # हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को देना होगा दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र         # हरियाणा के कांग्रेस विधायकों को पार्टी फंड के लिए नोटिस         # दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली करवट, हल्की बारिश से ठंड की वापसी        
News Description
विरोध बेअसर, प्रशासन ने जमीन कराया खाली

समालखा : डिजिटल गांव झट्टीपुर में गो चरांद की चार एकड़ जमीन को प्रशासन ने बृहस्पतिवार को कब्जामुक्त कराया। उन्हें विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन पुलिस बल के सामने कब्जाधारियों की एक न चली। करीब पौने तीन घंटे तक चली कार्रवाई में जेसीबी से भरी गई नींव व रखे गए उपले आदि को ध्वस्त कर दिया गया।

सरपंच अशोक कुमार ने बताया कि महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत गांव के 116 पात्र लोगों को वर्ष 2007-08 में सौ-सौ गज के प्लॉट अलाट किए गए, जिनकी रजिस्टरी उनके नाम हो चुकी है, लेकिन जिस जमीन को पंचायत ने अलॉट किया था, उस पर गांव के ही 20-30 परिवारों का कब्जा होने के कारण पात्र लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

जमीन खाली करने के लिए नोटिस देने के बाद प्रशासनिक अमला कई बार कार्रवाई करने पहुंचा भी, लेकिन विरोध के चलते हर बार बैरंग लौटना पड़ा। बृहस्पतिवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार अनिल कौशिक के नेतृत्व में कार्रवाई हुई और जमीन को कब्जामुक्त करा लिया गया।

उन्होंने कब्जाधारियों द्वारा अपात्र लोगों को प्लॉट देने के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पिछली पंचायत के कार्यकाल में ही प्लॉट अलॉट किए गए थे। कोई भी अपात्र शामिल नहीं है। कब्जाधारी ने हाईकोर्ट में प्लॉट वितरण में गड़बड़ी के साथ एक अन्य शिकायत दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने उपायुक्त से मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी। उपायुक्त ने सीटीएम से जांच कराई तो असलियत सामने आ गई। इसके बाद कब्जाधारी सिविल कोर्ट गए, कोर्ट ने जांच रिपोर्ट मिलने तक कार्रवाई न करने के आदेश दिए थे। जब हमने जांच रिपोर्ट कोर्ट में दी तो उन्होंने आदेश जारी कर दिए।