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11 घंटे में पांच लोगों के खून से लाल हुई सड़कें

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : 11 घंटे में पांच लोगों के खून से जिले की सड़कें लाल हो गईं। छछरौली के बरौली माजरा व कांजनू के पास हुए सड़क हादसों में दो लोगों की जान चली गई, जबकि तीन युवकों की मौत बृहस्पतिवार सुबह अंबाला नेशनल हाईवे पर हो गई। पिछले 20 दिनों में 15 लोगों की जान सड़क हादसों में जा चुकी है। सड़कों पर बेलगाम ट्रक व तेज रफ्तार बसें काल बनकर घूम रही हैं परंतु प्रशासन मौन है।

बड़ी संख्या में वाहन पंजीकृत

जिला में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 17 सालों में जिला में सवा तीन लाख बाइक, स्कूटर, कार ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के पास रजिस्टर्ड हुए हैं। इसके अलावा 75 हजार से अधिक कॉमर्शियल वाहन रजिस्टर्ड हुए हैं। इतने वाहनों का पंजीकरण हैरान कर देने वाला है। पहले केवल जगाधरी एसडीएम कार्यालय में ही वाहन पंजीकृत होते थे परंतु अब बिलासपुर एसडीएम कार्यालय में भी वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं। वहीं, अब रादौर को भी उपमंडल का दर्जा मिल गया है इसलिए नोटीफिकेशन जारी होते ही वहां भी पंजीकरण कार्य शुरू हो जाएगा।

हाइॅवे की नहीं बढ़ी चौड़ाई

अंबाला से जगाधरी, यमुनानगर होकर जो नेशनल हाईवे-73 सहारनपुर जा रहा है उसकी चौड़ाई आज भी वही है जो दो दशक पहले थी। एक तो हाइवे की चौड़ाई कम है और ये शहर के बीचोबीच से भी गुजर रहा है जबकि वाहनों की संख्या अधिक है। एक अरसे से हाईवे को चौड़ा करने की मांग हो रही है परंतु किसी भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। चौड़ाई कम होने से हाईवे पर हर समय जाम रहता है। स्थित ऐसी है कि एक बड़ा वाहन दूसरे वाहन को ओवरटेक नहीं कर सकता।

दूसरे राज्यों की बसों पर ट्रैफिक पुलिस मेहरबान

पंजाब रोडवेज हो या उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस। सभी जिला की सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ती हैं। उत्तर प्रदेश की बसें तो इतनी तेजी से चलती हैं कि इनके चालक सामने वाले को कुछ नहीं समझते। फिर भी यमुनानगर की ट्रैफिक पुलिस इन बसों के चालान नहीं काटती। कई बार तो इनके बस चालक पुलिस के सामने ही नियमों को तोड़ते हुए चलते हैं। वहीं नियम तोड़ने पर यमुनानगर रोडवेज की बसों के चालान अक्सर दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में कटते रहते हैं। इस बात की गवाही पुलिस का रिकार्ड भी दे रहा है। जिसमें अब तक दूसरे राज्यों की बसों का एक भी चालान नहीं है।

हाईवे से नीचे नहीं उतरता वाहन

हाईवे का तंग होना ही हादसे की वजह नहीं है बल्कि कच्चे व सड़कों से नीचे बरम भी इसका बड़ा कारण है। शहर के बाइपास पुल, डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक, संत निश्चल ¨सह स्कूल के सामने, ट्रैफिक थाना, कन्हैया साहिब चौक, जिला सचिवालय के सामने, जगाधरी बस स्टैंड के नजदीक, मिल्ट्री ग्राऊंड, रक्षक विहार नाका, रटौली रोड का मोड़, थाना सदर जगाधरी के सामने, के अलावा छप्पर तक कहीं भी बरम सड़क के लेवल में नहीं है। अंबाला रोड पर तो बरम सड़क से एक फुट नीचे है। यदि खुद को बचाने के लिए कोई वाहन नीचे उतारना पड़ जाए तो ऐसा नहीं कर सकते।

लकड़ी से लदी ट्राली से हुआ हादसा

तिहानो निवासी 38 वर्षीय रामपाल सैनी कलेसर के पास ढाबा चलाता था। बुधवार रात वह ढाबा बंद कर बाइक पर अपने गांव लौट रहा था। जब वह बरौली माजरा के पुल के पास पहुंचा तो सामने से आ रही लकड़ी से लदी तेज रफ्तार ट्रैक्टर ट्राली ने उसे टक्कर मार दी। जिससे वह सड़क के बीचोबीच गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गया। चालक ट्रैक्टर-ट्राली लेकर मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने घायल को जगाधरी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

साइकिल सवार को कैंटर ने मारी टक्कर

वहीं, गांव कांजनू निवासी 65 वर्षीय भरतू रात बृहस्पतिवार सुबह उठकर साइकिल पर अपने खेत में जा रहा था। जैसे ही वह सड़क पार करने लगा तो कैंटर ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। कैंटर चालक मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने उसे शहर के ट्रामा सेंटर पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृतक घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने अज्ञात कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी।

दसवीं पास की थी रोहित ने

गांव कैल निवासी बीरसेन ने बताया कि उसके पास तीन लड़कियां व दो बेटे थे। तीनों लड़कियां बड़ी हैं जबकि रोहित से छोटा एक बेटा है। छोटा बेटा अपाहिज है। रोहित ही उसका एकमात्र सहारा था लेकिन अब वो भी चला गया। रोहित ने अभी 10वीं कक्षा पास की थी। वे उसे आगे पढ़ने के लिए स्कूल भेज रहे थे। परंतु वह जिद करने लगा कि काम करेगा तो घर में कुछ पैसों का सहारा लग जाएगा।

सुबह ली सेल्फी, एक घंटे बाद चली गई जान

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : 11 घंटे में पांच लोगों के खून से जिले की सड़कें लाल हो गईं। छछरौली के बरौली माजरा व कांजनू के पास हुए सड़क हादसों में दो लोगों की जान चली गई, जबकि तीन युवकों की मौत बृहस्पतिवार सुबह अंबाला नेशनल हाईवे पर हो गई। पिछले 20 दिनों में 15 लोगों की जान सड़क हादसों में जा चुकी है। सड़कों पर बेलगाम ट्रक व तेज रफ्तार बसें काल बनकर घूम रही हैं परंतु प्रशासन मौन है। बड़ी संख्या में वाहन पंजीकृत जिला में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 17 सालों में जिला में सवा तीन लाख बाइक, स्कूटर, कार ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के पास रजिस्टर्ड हुए हैं। इसके अलावा 75 हजार से अधिक कॉमर्शियल वाहन रजिस्टर्ड हुए हैं। इतने वाहनों का पंजीकरण हैरान कर देने वाला है। पहले केवल जगाधरी एसडीएम कार्यालय में ही वाहन पंजीकृत होते थे परंतु अब बिलासपुर एसडीएम कार्यालय में भी वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं। वहीं, अब रादौर को भी उपमंडल का दर्जा मिल गया है इसलिए नोटीफिकेशन जारी होते ही वहां भी पंजीकरण कार्य शुरू हो जाएगा। हाइॅवे की नहीं बढ़ी चौड़ाई अंबाला से जगाधरी, यमुनानगर होकर जो नेशनल हाईवे-73 सहारनपुर जा रहा है उसकी चौड़ाई आज भी वही है जो दो दशक पहले थी। एक तो हाइवे की चौड़ाई कम है और ये शहर के बीचोबीच से भी गुजर रहा है जबकि वाहनों की संख्या अधिक है। एक अरसे से हाईवे को चौड़ा करने की मांग हो रही है परंतु किसी भी सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। चौड़ाई कम होने से हाईवे पर हर समय जाम रहता है। स्थित ऐसी है कि एक बड़ा वाहन दूसरे वाहन को ओवरटेक नहीं कर सकता। दूसरे राज्यों की बसों पर ट्रैफिक पुलिस मेहरबान पंजाब रोडवेज हो या उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस। सभी जिला की सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ती हैं। उत्तर प्रदेश की बसें तो इतनी तेजी से चलती हैं कि इनके चालक सामने वाले को कुछ नहीं समझते। फिर भी यमुनानगर की ट्रैफिक पुलिस इन बसों के चालान नहीं काटती। कई बार तो इनके बस चालक पुलिस के सामने ही नियमों को तोड़ते हुए चलते हैं। वहीं नियम तोड़ने पर यमुनानगर रोडवेज की बसों के चालान अक्सर दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में कटते रहते हैं। इस बात की गवाही पुलिस का रिकार्ड भी दे रहा है। जिसमें अब तक दूसरे राज्यों की बसों का एक भी चालान नहीं है। हाईवे से नीचे नहीं उतरता वाहन हाईवे का तंग होना ही हादसे की वजह नहीं है बल्कि कच्चे व सड़कों से नीचे बरम भी इसका बड़ा कारण है। शहर के बाइपास पुल, डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक, संत निश्चल ¨सह स्कूल के सामने, ट्रैफिक थाना, कन्हैया साहिब चौक, जिला सचिवालय के सामने, जगाधरी बस स्टैंड के नजदीक, मिल्ट्री ग्राऊंड, रक्षक विहार नाका, रटौली रोड का मोड़, थाना सदर जगाधरी के सामने, के अलावा छप्पर तक कहीं भी बरम सड़क के लेवल में नहीं है। अंबाला रोड पर तो बरम सड़क से एक फुट नीचे है। यदि खुद को बचाने के लिए कोई वाहन नीचे उतारना पड़ जाए तो ऐसा नहीं कर सकते। लकड़ी से लदी ट्राली से हुआ हादसा तिहानो निवासी 38 वर्षीय रामपाल सैनी कलेसर के पास ढाबा चलाता था। बुधवार रात वह ढाबा बंद कर बाइक पर अपने गांव लौट रहा था। जब वह बरौली माजरा के पुल के पास पहुंचा तो सामने से आ रही लकड़ी से लदी तेज रफ्तार ट्रैक्टर ट्राली ने उसे टक्कर मार दी। जिससे वह सड़क के बीचोबीच गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गया। चालक ट्रैक्टर-ट्राली लेकर मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने घायल को जगाधरी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। साइकिल सवार को कैंटर ने मारी टक्कर वहीं, गांव कांजनू निवासी 65 वर्षीय भरतू रात बृहस्पतिवार सुबह उठकर साइकिल पर अपने खेत में जा रहा था। जैसे ही वह सड़क पार करने लगा तो कैंटर ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। कैंटर चालक मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने उसे शहर के ट्रामा सेंटर पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृतक घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने अज्ञात कैंटर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी। दसवीं पास की थी रोहित ने गांव कैल निवासी बीरसेन ने बताया कि उसके पास तीन लड़कियां व दो बेटे थे। तीनों लड़कियां बड़ी हैं जबकि रोहित से छोटा एक बेटा है। छोटा बेटा अपाहिज है। रोहित ही उसका एकमात्र सहारा था लेकिन अब वो भी चला गया। रोहित ने अभी 10वीं कक्षा पास की थी। वे उसे आगे पढ़ने के लिए स्कूल भेज रहे थे। परंतु वह जिद करने लगा कि काम करेगा तो घर में कुछ पैसों का सहारा लग जाएगा। सुबह ली सेल्फी, एक घंटे बाद चली गई जान