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बिजली बिल भरने के लिए लड़नी पड़ रही जंग

कैथल : पिहोवा चौक स्थित राजीव गांधी बिजली निगम कार्यालय में बिजली बिल भरने के लिए हालात जंग के मैदान जैसे थे। बिल भरने के लिए लंबी लंबी कतारें लगी थी। सही व्यवस्था नहीं होने से लोग एक दूसरे के साथ लड़ रहे थे। हालात ये थे कि बिल भरे जाने वाले एरिया में पैर रखने को भी जगह नहीं थी। बिल लेने वाले कर्मचारी अंदर केबिन में कुंडी लगाकर अंदर बैठे थे और अधिकारी ऊपर अधीक्षक अभियंता के कार्यालय में सीएम अनाउंसमेंट की बैठक में व्यस्त थे। नीचे लोग बिल भरने के लिए मारामारी कर रहे हैं और एक दूसरे पर चीख चिल्ला रहे हैं इससे किसी को लेना देना नहीं था। लोगों का कहना था कि वह सुबह नौ बजे और कुछ ग्रामीण तो इससे भी पहले ही पहुंचकर कतार में लग गए थे। उसके बावजूद भी बिल भरने के लिए नंबर नहीं पड़ रहा था। जब घंटों तक भी इंतजार खत्म नहीं हुआ तो लोग खफा दिखे, लेकिन उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था।

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हालातों के लिए व्यवस्था है जिम्मेदार

लोग चार दिन की छुट्टी और बिल भरने की अंतिम तिथि होने या नजदीक होने के कारण सैकड़ों की संख्या में बिल भरने के लिए पहुंचे थे। जो एरिया बिल भरने के लिए बनाया गया हैं, वहां एक समय में 25 से 30 से ज्यादा उपभोक्ताओं के लिए ठीक से खड़े होने की भी सुविधा नहीं है। बुधवार को यहां सैकड़ों लोग जमा थे। यहां इंतजार करने के लिए कोई कमरा तक नहीं बनाया गया है, ना ही बैठने की कोई सुविधा है। नंबर आने की सूचना के लिए जो कोई डिसप्ले नहीं लगाया गया था। बाहर व्यवस्था बनाने के लिए कोई कर्मचारी भी तैनात नहीं था।

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बाहर वाहन पार्क करने को भी नहीं थी जगह

चार दिनों की छुट्टी के बाद बिल भरने के लिए जुटी उपभोक्ताओं की भीड़ के कारण विद्युत सदन के अंदर पार्किंग क्षेत्र भी वाहनों से भरा हुआ था। बेतरतीब खड़े वाहनों की कतार गेट तक पहुंची थी। गेट से प्रवेश करना भी मुश्किल था। यहां भी कोई वाहनों के खड़ा करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी।

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पहली लाइन से निकला तो दूसरी में फंसा

बिल भरने के लिए पहुंचे टेका राम ने बताया कि वह सुबह नौ बजे का कार्यालय में पहुंचा हुआ है। पहले बिल ठीक करवाने के लिए लाइन में लगा और अब बिल भरने के लिए करीब ढाई घंटे से लाइन में लगा हूं। अब भी कब बिल भर जाएगा पता नहीं है।

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बनानी चाहिए व्यवस्था

लोगों को बिल भरने के लिए धक्का मुक्की करते देख ओमप्रकाश ने कहा कि कोई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। लोग पशुओं की तरह एक दूसरे टकरा रहे हैं। खुद भी सुबह से लाइन में खड़ा हूं। लोग चिल्ला रहे हैं कोई सुनने वाला नहीं है।

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दिव्यांग संत राम ने बताया कि वह भी सुबह से सामान्य लाइन में खड़ा है। उसके लिए खड़ा हो पाना भी मुश्किल है। एक ही खिड़की पर बुजुर्ग, महिलाएं, सामान्य श्रेणी और दिव्यांग के बिल लिए जा रहे हैं। वहां लोग लड़ रहे हैं इसलिए सोचा कि सामान्य लाइन में ही खड़ा होने में फायदा है।