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यूरिया के लिए चल रही मारामारी, स्टॉक खत्म

 झज्जर : क्षेत्र में खाद की पर्याप्त आपूर्ति न आने की वजह से यूरिया की कमी खल रही है। किसान खाद नहीं मिलने से परेशान हैं। जिला में खाद का स्टॉक खत्म हो चुका है और जो खाद आ रहा है वह भी साथ-साथ बिक जाता है। किसानों को खाद के लिए कभी प्राइवेट खाद विक्रेताओं के पास तो कभी सरकारी खाद बिक्री केंद्रों पर चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिला में डिमांड के हिसाब से खाद नहीं पहुंच रहा है। जिले की डिमांड के अनुसार खाद की आवक निरंतर हो रही है। विभाग के अनुसार जिले में सात लाख बैग खाद की डिमांड मार्च तक होती है। जबकि इस बार फिलहाल तक जिले में करीब 3 लाख बैग यूरिया के सरकारी व प्राइवेट बिक्री केंद्रों से बेचा जा चुका है। गेहूं की फसल की बिजाई पूरी हो चुकी है। अब किसानों ने गेहूं की फसल की ¨सचाई के बाद गेहूं की फसल में यूरिया का छिड़काव भी शुरू किया हुआ है। किसान एक एकड़ भूमि में एक से दो बैग यूरिया डालते हैं। जबकि कुछ किसान तो अधिक पैदावार के चक्कर में तीन-तीन बैग तक एक एकड़ भूमि में यूरिया डाल देते हैं। लेकिन किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद का छिड़काव नहीं किया तो फसल की पैदावार पर भी प्रभाव पड़ेगा। जिले के हिस्से का करीब 4 लाख कट्टे खाद बचा हुआ है। खाद की सप्लाई पूरी न होने से किसानों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

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पैक्सों पर डिमांड के अनुसार नहीं पहुंच रहा खाद

किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए शहरी क्षेत्र में सरकारी खाद बिक्री खोले हुए हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्सों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जाता है। जिले में दो सीएमएस सेंटर व 23 पैक्सों के माध्यम से सरकारी दर 295 रुपये प्रति बैग यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि प्राइवेट तौर पर खाद की बिक्री के लिए 365 दुकानें जिले में हैं। फिलहाल न तो सरकारी केंद्रों पर और न ही प्राइवेट बिक्री केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद पहुंच रहा है। हर तरफ खाद के लिए हर तरफ मारा मारी चल रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की फसल की बिजाई की गई है। जबकि कुछ किसान सरसों, जौ व अन्य फसलों में यूरिया का छिड़काव करते हैं।