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तालमेल न होने के कारण अधिकारियों ने रद की सीईटीपी योजना

यमुनानगर : विधानसभा अध्यक्ष कंवर पाल की सिफारिश पर सीएम ने जगाधरी की औद्योगिक इकाइयों से निकल रहे केमिकल युक्त पानी को ट्रीट करने के लिए कॉमन इन्फ्ल्यूंट प्लांट (सीईटीपी) बनाए जाने की घोषणा की थी, लेकिन अधिकारियों में तालमेल न होने के कारण योजना को अब रद कर दिया गया। हालात यह हैं मेटल नगरी से निकल रहा केमिकल युक्त पानी धरती में जहर घोलने का काम कर रहा है और सीधा नहर में डाला जा रहा है।

बता दें कि जगाधरी में मेटल की छोटी-बड़ी 1500 औद्योगिक इकाइयां हैं। बर्तन तैयार करते समय विभिन्न धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है और काफी मात्रा में वेस्ट निकलता है जो नालियों में बह रहा है।

जगाधरी में बनने वाले सीईटीपी का संबंध चार विभागों से है। इनमें इंडस्ट्री विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, जन स्वास्थ्य एंव अभियांत्रिकी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शामिल है। लेकिन सभी विभाग एक दूसरे की जिम्मेदारी बता रहे हैं। स्थानीय निकाय विभाग ने रेडक्रास की चार एकड़ जमीन के लिए एनओसी नगर निगम ने उपलब्ध करवा दी, लेकिन अन्य तीनों विभागों की ओर से कदम नहीं बढ़ाए गए। बाद में अधिकारियों जगह उपयुक्त न होने का हवाला देते हुए इस परियोजना को ही रद कर दिया।

जगाधरी शहर मेटल उद्योग से विख्यात है और चम्मच से लेकर बड़े कढ़ाहे तक बनते हैं, लेकिन अधिकांश में अधिकांश में पानी को ट्रीट करने की व्यवस्था नहीं है। डिस्चार्ज हो रहे पानी में निकिल, ¨जक, कॉपर, क्रोमिमय जैसी भारी धातुएं होती हैं, जो हमारी खाद्य श्रृंखला में मिल जाती हैं। न केवल जलीय जीव जंतु प्रभावित होते हैं, बल्कि अनाज व सब्जियों पर भी इनका असर देखा जा सकता है