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संस्कारशाला परीक्षा में बच्चों ने गढ़े संस्कारों के मोती

गुरुग्राम: न कोई फार्मूला न कोई परिभाषा। पाठ्यक्रम वही जो घर की पाठशाला में बच्चा सीखता है। ¨जदगी के जो सूत्र जागरण ने 12 सितंबर 2017 से 16 नवंबर 2017 तक संस्कारशाला के जरिये बच्चों को सिखाए थे, उन्हीं संस्कारों को बुधवार को इम्तिहान के जरिये कागज पर उतारने की बारी थी। दैनिक जागरण द्वारा संस्कारों को गढ़ने के लिए आयोजित की गई 'संस्कारशाला परीक्षा' में एक बार फिर विद्यार्थियों ने अपने ज्ञान की परीक्षा देकर संस्कारों के मोती को उत्तर पुस्तिका में पिरोया। शहर के पांच स्कूलों में आयोजित परीक्षा में करीब पांच हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा के दौरान विद्यार्थी उत्साहित नजर आए। सभी केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण एवं अनुशासन में संपन्न हुई।

तीन श्रेणियों में बने प्रश्नपत्र

परीक्षा का आयोजन तीन श्रेणियों में किया गया। पहली श्रेणी में कक्षा तीन से पांच तक, दूसरी श्रेणी में कक्षा छह से आठ तक और तीसरी श्रेणी में कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थी शामिल हुए। तीनों के लिए प्रश्न पत्र भी अलग रहा। तीनों कैटेगरी में छात्र-छात्राओं ने बड़े ही उत्साह से भाग लिया।

पहले चरण में इन स्कूलों में हुआ आयोजन

संस्कारशाला परीक्षा के लिए साइबर सिटी के 23 विद्यालयों के बीस हजार बच्चों ने पंजीकरण करवाया था। जिसके पहले चरण में बुधवार को ग्रीनवुड पब्लिक स्कूल, केंद्रीय विद्यालय गुरुग्राम, मीनाक्षी पब्लिक स्कूल, सीसीए स्कूल व मीनाक्षी व‌र्ल्ड स्कूल के बच्चे परीक्षा में शामिल हुए।

प्रश्नपत्र देख डर हुआ छू-मंतर

सवालों को लेकर प्रश्नपत्र मिलने से पहले विद्यार्थियों के मन में तरह-तरह की शंकाएं थीं। आखिर प्रश्न पत्र कैसा होगा और उसमें क्या पूछा जाएगा। लेकिन प्रश्न पत्र मिलते ही उनका डर छू-मंतर हो गया। संस्कारशाला में पूछे गए सवाल ऐसे थे कि जिनका जवाब रटकर नहीं दिया जा सकता था। न ही कोई भी सवाल पाठ्यक्रम से था। ¨जदगी से जुड़े सवाल, सहनशीलता, व्यक्तित्व का विकास, ईमानदारी, सदाचार, टेक्नोलॉजी सहित अन्य विषयों से थे।

संस्कारों के सवाल पर खूब चली कलम

परीक्षा में विद्यार्थियों ने संस्कारों की गंगा बहा दिया। अधिकतर विद्यार्थियों ने संस्कारशाला की परीक्षा के सभी सवाल समय से पहले ही कर दिया।

सवालों के जरिये दी नैतिक शिक्षा

संस्कारशाला की परीक्षा में न सिर्फ बच्चों को अपने परिजनों का सम्मान करने संबंधी प्रश्न पूछे गए बल्कि उनके अंदर छिपे मानवीय पक्ष को जगाने का प्रयास भी किया गया।