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राम रहीम आंदोलन से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाया रोहतक

रोहतक: खट्टी-मीठी यादों के बीच बीता 2017 चार दिन बाद खत्म हो जाएगा। एक बार फिर नई उम्मीदों और नए सपनों के साथ 2018 का आगाज होगा। 2017 में दो ऐसे मामले आए जिनकी वजह से रोहतक न केवल अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाया, बल्कि दोनों ही मामलों को लेकर सरकार के पसीने छूटे रहे। इसमें एक था राम रहीम को दोषी ठहराकर रोहतक की जेल में भेजा जाना और दूसरा प्रकरण जसिया में 55 दिनों तक चला जाटों का धरना था। दोनों ही मामलों ने रोहतक को सुर्खियों में ला दिया था। 2017 के आखिरी दिनों में आइए जानते हैं इन दोनों प्रकरण का हाल ए बयां।

जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर रोहतक-पानीपत हाइवे पर स्थित जसिया गांव की कोई विशेष पहचान नहीं था। फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर प्रदेश के कई जिलों में घटनाएं हुई। यहां तक कि सेना को मोर्चा संभालना पड़ा। हालांकि जाट आरक्षण को लेकर लंबे समय से मांग चल रही थी, लेकिन इस आंदोलन के बाद आरक्षण के साथ-साथ जेलों में बंद युवाओं की रिहाई और घायलों के मुआवजे को लेकर भी आंदोलन शुरू हो गया था। 2016 में ही पहली यशपाल मलिक खेमे ने जसिया में धरना शुरू किया था। काफी दिनों तक धरना चला और फिर आश्वासन पर खत्म कर दिया गया। मांग पूरी नहीं होने पर 29 जनवरी 2017 को फिर से जसिया में धरना शुरू कर डेरा डाल दिया गया। 55 दिनों तक चले धरने के दौरान दूर-दराज से नेता और जाट समाज के लोग वहां पहुंचे। धरने के दौरान सरकार की हट को देखते हुए 20 मार्च को दिल्ली कूच का ऐलान कर दिया गया था। इस ऐलान के बाद जसिया धरना एकाएक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। प्रदेश सरकार के साथ-साथ दिल्ली सरकार की भी नींद उड़ गई। दिल्ली कूच की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी, लेकिन सरकार ने 19 मार्च को दिल्ली में एक बार फिर से आश्वासन देकर समझौता करा दिया। तब जाकर 22 मार्च को धरना खत्म हुआ और सरकार ने राहत की सांस ली।