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शहर के होटल संचालकों को पढ़ाया जाएगा स्वच्छता का पाठ

हिसार : स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 को लेकर नगर निगम अधिकारियों को अंकों के गणित को समझना होगा। तभी वह स्वच्छ सर्वेक्षण में अपना बेस्ट दे पाएंगे। इसी कड़ी में बुधवार को शहर के सभी होटल मालिकों की बैठक नगर निगम में बुलाई गई है। इस बैठक में उन्हें स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाएगा। इतना ही नहीं, स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की जानकारी दी जाएगी। जिससे जब टीम उनके होटलों में सर्वे के लिए आए तो अंकों में कटौती न हो जाए। डस्टबिन से लेकर सेग्रीगेशन के बारे में होटल संचालकों को जानकारी दी जाएगी। होटल मालिकों से उनके स्टॉफ को स्वच्छता और डस्टबिन के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी लगाई जाएगी। ताकि हमारा शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर अंक प्राप्त कर सके।बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र और शौचालयों की व्यवस्था पर फोकस करना जरूरी है। यदि मामूली सी चूक भी रहती है तो अंक कटने तय हैं। डस्टबिन से लेकर स्वच्छ सर्वेक्षण की जानकारी दिया जाना अहम रहेगा। इसके अलावा पोस्टर, बैनर और वॉल पें¨टग भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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गाड़ियों पर लगाए माइक, गीले और सूखे कूड़े के देंगे संदेश

नगर निगम ने कूड़ा उठाने वाली आठ टाटा एस में माइक लगवाया है। सभी माइक के माध्यम से लोगों को स्वच्छ सर्वेक्षण और कचरा प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। जनता में इससे जागरूकता आएगी और लोग कचरा प्रबंधन की अहमियत समझेंगे। भले ही अभी नगर निगम अपना कचरा प्रबंधन प्लांट नहीं लगा पाया है। बावजूद इसके वह कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है, जिससे भविष्य में लोगों को कचरा प्रबंधन की आदत डालने की जरूरत न पड़े। इसके अलावा वाहनों में जीपीएस सिस्टम भी जल्द ही लगा दिए जाएंगे।

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पार्षदों का सहयोग जरूरी

शहर को यदि स्वच्छ सर्वेक्षण में अपनी छाप छोड़नी है तो पार्षदों को अधिकारियों का सहयोग करना होगा। लोगों को कचरा प्रबंधन और स्वच्छ सर्वेक्षण के बारे में जानकारी देने का काम पार्षदों को निगम कर्मचारियों के साथ टीम बनाकर करना होगा। सभी वार्डों में स्पेशल टीमों का गठन किया जाना जरूरी है, तभी आठ दिनों के अंदर लोगों को पूर्ण रूप से जानकारी मिल पाएगी। निगम अधिकारियों को युद्ध स्तर पर अभियान चलाना होगा। चुनावों की तरह आठ दिनों तक लगातार स्वच्छता पर फोकस करना पड़ेगा और यह पार्षदों के सहयोग से ही संभव हो पाएगा। वार्डबंदी की तरह टीमों को शहर में उतरना पड़ेगा।बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र और शौचालयों की व्यवस्था पर फोकस करना जरूरी है। यदि मामूली सी चूक भी रहती है तो अंक कटने तय हैं। डस्टबिन से लेकर स्वच्छ सर्वेक्षण की जानकारी दिया जाना अहम रहेगा। इसके अलावा पोस्टर, बैनर और वॉल पें¨टग भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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गाड़ियों पर लगाए माइक, गीले और सूखे कूड़े के देंगे संदेश

नगर निगम ने कूड़ा उठाने वाली आठ टाटा एस में माइक लगवाया है। सभी माइक के माध्यम से लोगों को स्वच्छ सर्वेक्षण और कचरा प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। जनता में इससे जागरूकता आएगी और लोग कचरा प्रबंधन की अहमियत समझेंगे। भले ही अभी नगर निगम अपना कचरा प्रबंधन प्लांट नहीं लगा पाया है। बावजूद इसके वह कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है, जिससे भविष्य में लोगों को कचरा प्रबंधन की आदत डालने की जरूरत न पड़े। इसके अलावा वाहनों में जीपीएस सिस्टम भी जल्द ही लगा दिए जाएंगे।

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पार्षदों का सहयोग जरूरी

शहर को यदि स्वच्छ सर्वेक्षण में अपनी छाप छोड़नी है तो पार्षदों को अधिकारियों का सहयोग करना होगा। लोगों को कचरा प्रबंधन और स्वच्छ सर्वेक्षण के बारे में जानकारी देने का काम पार्षदों को निगम कर्मचारियों के साथ टीम बनाकर करना होगा। सभी वार्डों में स्पेशल टीमों का गठन किया जाना जरूरी है, तभी आठ दिनों के अंदर लोगों को पूर्ण रूप से जानकारी मिल पाएगी। निगम अधिकारियों को युद्ध स्तर पर अभियान चलाना होगा। चुनावों की तरह आठ दिनों तक लगातार स्वच्छता पर फोकस करना पड़ेगा और यह पार्षदों के सहयोग से ही संभव हो पाएगा। वार्डबंदी की तरह टीमों को शहर में उतरना पड़ेगा।

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