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विकेंद्रित अर्थव्यवस्था पर टिका है दीनदयान का दर्शन: हुकमदेव

रेवाड़ी: किसानों का दर्द समझना है तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन को अपनाना होगा। उनका दर्शन विक्रेंद्रित अर्थव्यवस्था पर टिका हुआ है। कांग्रेस के शासन में विदेशी शक्तियों का भारत की खेती में लगातार दखल बढ़ा, जिसकी देश को आज भी कीमत चुकानी पड़ रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने छोटी जोत के किसानों का दर्द समझा है। मोदी की पं. दीनदयाल के दर्शन से प्रेरित नीतियों की बदौलत छोटी जोत में अधिक आमदनी का मार्ग प्रशस्त होगा। यह बात मधुबनी के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकमदेव नारायण यादव ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अर¨वद यादव के आवास पर कही। आधुनिक अन्नदाता अभियान पर कहा कि यह अभियान छोटी जोत के किसानों का मददगार बनेगा।

पूर्व मंत्री ने कहा कि एक जमाना था जब पंजाब, हरियाणा व पश्चिम उत्तर प्रदेश जैसे गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में किसान शुरूआत में रसायनिक खाद को अपनाने के लिए तैयार नहीं हुए। जैविक खेती उनका सहारा थी। उन्होंने कहा कि मेरा यह मानना है कि कांग्रेस के शासनकाल में दूरगामी दुष्परिणामों पर ध्यान नहीं दिया गया। योजनाबद्ध तरीके से जैविक खेती को ठिकाने लगा दिया गया। गो आधारित अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया गया। कूड़ी की खाद गायब हो गई। उन्नत बीजों के नाम पर देश को गेहूं की बौनी किस्म दे दी गई।

हुकमदेव ने कहा कि अब एक नई कृषि क्रांति की जरूरत है। हम जमीन को बंजर होते नहीं देख सकते। मोदी सरकार ने इसे समझा है। युद्ध स्तर पर सोयल हेल्थ कार्ड इसका परिणाम है। अफसरशाही सही कामों में रुकावट डालती है।