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आधार लिंक के बावजूद फैक्ट्रियों में जा रही किसानों की सब्सिडी वाली खाद

चंडीगढ़ ; हरियाणा की भाजपा सरकार को विरासत में मिले यूरिया खाद के संकट का इस बार भी सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार का दावा है कि उसके गोदाम में पर्याप्त खाद है, लेकिन लाइन में लगे किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हो रही। किसानों को दी जाने वाली खाद पर चूंकि भारी सब्सिडी मिलती है, इसलिए अधिकतर यह खाद फैक्ट्रियों में पहुंच रही है। यह काम अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल प्लाईवुड फैक्ट्रियों में होता है, जिसकी मदद से गत्ता बनाने के लिए कच्चे माल को गलाया जाता है। कुछ खाद हरियाणा से बाहर भी जाने के आरोप लोग लगाते हैं।

फैक्ट्री मालिकों व अफसरों की यह मिलीभगत हरियाणा सरकार की जानकारी में भी आ चुकी है, लेकिन इसे अभी तक पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए आधार कार्ड के जरिए खाद देने का एक प्रयोग किया है, जो पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है। इसका असर यह हुआ कि किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही  है और विपक्ष को तीन साल बाद एक बार फिर सरकार को घेरने का मौका मिल गया है।

विभिन्न जिलों में आधार कार्ड को लिंक करने के लिए जो मशीनें भेजी गई हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं तथा कई मशीनों में आधार लिंक नहीं हो रहा है। नतीजतन राज्य में पर्याप्त खाद होने के बावजूद किसानों में मारामारी मची हुई है। कई जिलों में तो महिलाओं को भी लाइन में लगे देखा गया है। यही हालात करीब तीन साल पहले भी थे।

प्रदेश में हर साल करीब 20 लाख टन खाद की जरूरत होती है। रबी की फसल के लिए  11.5 लाख टन तथा खरीफ की फसल के लिए 8.5 लाख टन खाद चाहिए।